जामताड़ा: चैत्र नवरात्र के अवसर पर जामताड़ा के प्रसिद्ध मां रखा काली मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां नवरात्रि का उत्सव बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। मां रखा काली मंदिर नवरात्रि के दौरान भक्ति और आस्था का केंद्र बन जाता है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। भक्त मां के दर्शन और पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि चैत्र नवरात्र के समय विभिन्न क्षेत्रों से भक्त यहां आते हैं और विधिपूर्वक मां की पूजा करते हैं। उनका मानना है कि मां सभी की इच्छाएं पूरी करती हैं।
मां रखा काली मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
जामताड़ा का मां रखा काली मंदिर एक प्राचीन और प्रतिष्ठित देवस्थान है। लोकमान्यता के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना जामताड़ा के राजा ने अपनी प्रजा की सुरक्षा और कल्याण के लिए की थी। तभी से यह मंदिर ‘रखा काली मंदिर’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। विशेष तौर पर चैत्र माह में श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए आते हैं।
चैत्र नवरात्रि उत्सव का भव्य आयोजन
हर साल चैत्र नवरात्रि उत्सव को पूरे हर्षोल्लास और परंपरा के साथ मनाया जाता है। इस दौरान मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सजाया जाता है। नौ दिनों तक मां की विशेष पूजा होती है, जिसमें कन्या पूजन, हवन, और भक्ति कार्यक्रम शामिल रहते हैं। रामनवमी के दिन भव्य उत्सव का समापन होता है। इन नौ दिनों में मां को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है, और इसे प्रसाद के रूप में भक्तगणों के बीच वितरित किया जाता है।
श्रद्धालुओं की भावन
श्रद्धालुओं का कहना है कि मां रखा काली मंदिर बहुत पुराना है और इसे जामताड़ा के राजा ने स्थापित किया था। मां का नाम ‘रखा काली‘ इसलिए पड़ा क्योंकि वह अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। यही विश्वास श्रद्धालुओं को दूर-दूर से यहां खींच लाता है। लोग यहां आकर मां का दर्शन कर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।


