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Monday, March 9, 2026

झारखड विधानसभा : बीओआई के साथ एमओयू की सुविधाओं पर सवाल, सारंडा में उग्रवादी गतिविधियों पर भी हुई चर्चा

रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन सोमवार को बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) के साथ राज्य सरकार के हुए एमओयू से मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सदन में चर्चा हुई। वहीं सारंडा क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विस्तृत बहस हुई।

विधायक अमित कुमार यादव ने सदन में सवाल उठाते हुए पूछा कि बैंक ऑफ इंडिया के साथ हुए एमओयू के तहत मिलने वाली सुविधाएं क्या राज्य के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, सचेतकों और विभिन्न बोर्ड, निगम तथा आयोगों के अध्यक्षों के साथ काम करने वाले निजी सचिवों और सहायकों को भी मिलेंगी। उन्होंने विशेष रूप से बाहरी कोटा से नियुक्त कर्मियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें भी जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, आवास ऋण और शिक्षा ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।

इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य सह वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि राज्य सरकार और बैंक ऑफ इंडिया के बीच हुए एमओयू के तहत सरकारी और संविदा कर्मियों को बीमा और ऋण की सुविधाएं दी जा रही हैं, बशर्ते उनका सैलरी अकाउंट बैंक ऑफ इंडिया में हो। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा विभिन्न बोर्ड, निगम और आयोगों के अध्यक्षों के साथ काम करने वाले बाहरी कोटा के कर्मी भी इन सुविधाओं के पात्र होंगे। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ये सुविधाएं संबंधित कर्मियों को तब तक मिलती रहेंगी, जब तक वे अपने पद पर कार्यरत रहेंगे और उनका सैलरी अकाउंट बैंक ऑफ इंडिया में रहेगा।

इसी दौरान सदन में सारंडा क्षेत्र में बढ़ती उग्रवादी गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। विधायक सरयू राय ने सरकार से कई सवाल उठाते हुए कहा कि गृह विभाग की ओर से दिए गए उत्तर में अनुलग्नक संलग्न होने की बात कही गई थी, लेकिन वह उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि बिना अनुलग्नक के दिया गया उत्तर अधूरा प्रतीत होता है और इससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती।

सरयू राय ने यह भी सवाल किया कि सारंडा क्षेत्र में ही उग्रवादी गतिविधियां अधिक क्यों देखने को मिलती हैं। उन्होंने इसके पीछे खनन, गरीबी और बेरोजगारी जैसे कारणों की संभावनाओं पर भी सवाल उठाया। साथ ही उन्होंने पिछले 20 वर्षों का तुलनात्मक आंकड़ा उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई से कितनी सफलता मिली है। उन्होंने आईईडी विस्फोटों में जवानों की शहादत पर चिंता जताते हुए पूरे क्षेत्र में आईईडी का सर्वे कराने की भी मांग की।

इस पर जवाब देते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि सरकार उग्रवादी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चला रही है। उन्होंने बताया कि सारंडा का घना जंगल उग्रवादियों के लिए छिपने का सुरक्षित स्थान बन जाता है, जिससे उन्हें अपनी गतिविधियां चलाने में आसानी होती है। मंत्री ने कहा कि पिछले 24 वर्षों की तुलना में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सारंडा क्षेत्र में सबसे प्रभावी कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की आत्मसर्पण नीति के कारण कई उग्रवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि पहले की तुलना में अब उग्रवादी गतिविधियां काफी कम हो गई हैं और यह लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक रह गई हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जो लोग भटक गए हैं, वे धीरे-धीरे मुख्यधारा में वापस आएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उग्रवाद पर नियंत्रण पाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

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