खूंटी। जिले की धरती इन दिनों आम के मंजरों की खुशबू से सराबोर है। गांवों से लेकर बागानों तक, जहां नजर डालिए वहीं आम के पेड़ मंजरों से लदे दिखाई दे रहे हैं। बीजू एम हो, आम्रपाली हो या अन्य देसी-विदेशी प्रजातियों के आम इस वर्ष पेड़ों पर मंजरों की ऐसी बहार आई है कि कई जगह पत्ते तक नजर नहीं आ रहे हैं। यह दृश्य न केवल किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला रहा है, बल्कि आने वाले मौसम में भरपूर आम उत्पादन की मजबूत उम्मीद भी जगा रहा है।
कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ राजन चौधरी ने गुरुवार को बताया कि इस बार मौसम आम की फसल के अनुकूल रहा है। सर्दियों में पर्याप्त ठंड, समय पर नमी और अब हल्की गर्मी—इन सभी कारकों ने आम के पेड़ों में अच्छी फ्लावरिंग को बढ़ावा दिया है। यदि आने वाले दिनों में तेज आंधी, ओलावृष्टि या असामान्य बारिश नहीं होगी तो आम की फसल रिकॉर्ड स्तर पर होने की संभावना है। यही कारण है कि किसान अभी से फसल को लेकर आशान्वित हैं। उन्होंने आम उत्पादक किसानों से कहा कि जब मंजर में टिकोरे आने लगे, तो एक लीटर पानी में डेढ़ मिलीलीटर (एमएल) में कोजेब दवा का छिड़काव करें।
वहीं कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) के सहायक परियोजना निदेशक अमरेश कुमार ने कहा कि खूंटी जिला पहले से ही आम उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां की मिट्टी, जलवायु और परंपरागत बागवानी पद्धतियां आम के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। जिले के कई गांवों में आम केवल फल नहीं, बल्कि आजीविका का प्रमुख साधन है। आम्रपाली जैसी उन्नत किस्में जहां बेहतर उत्पादन और बाजार मूल्य देती हैं, वहीं बीजू एम हो और देसी किस्में स्वाद और सुगंध के लिए प्रसिद्ध हैं। इस वर्ष मंजरों की संख्या देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बाहर के बाजारों में भी खूंटी के आमों की अच्छी मांग रहेगी।
किसानों का कहना है कि वे कीट-रोग प्रबंधन और सिंचाई पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, ताकि मंजरों से फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित न हो। कृषि विभाग की ओर से समय-समय पर दी जा रही सलाह भी किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। यदि सब कुछ अनुकूल रहा, तो यह मौसम न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि खूंटी की पहचान को आम उत्पादन के हब के रूप में और मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर, मंजरों से लदे आम के पेड़ इस बात के संकेत हैं कि प्रकृति इस बार मेहरबान है। आम की इस बहार के साथ ही खूंटी के किसानों में समृद्धि की उम्मीदें भी पल्लवित हो रही हैं।


