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Saturday, February 21, 2026

भाजपा विधायक नीरा यादव ने बजट खर्च और योजनाओं के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल

रांची। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक नीरा यादव ने झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान तृतीय अनुदान मांगों के कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और बजट खर्च पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि राज्य का बजट लगातार बढ़ रहा है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह राशि किस स्तर पर, कहां और किस प्रकार खर्च की जा रही है, क्योंकि कई योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता।

नीरा यादव ने कहा कि योजनाओं के नाम पर प्रतिदिन करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में नलों में पानी नहीं आ रहा है, नालियां जाम और गंदी पड़ी हैं तथा कई अधूरे कार्यों को कागजों में पूरा दिखा दिया गया है। उन्होंने मंईया सम्मान योजना पर बढ़ते खर्च का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे अन्य विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि कई विकास योजनाओं का शिलान्यास स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सूचना दिए बिना कर दिया जाता है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने भूमि संरक्षण पदाधिकारी हिमांशु कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय विधायक को कार्यक्रम में शामिल करने का कोई निर्देश नहीं होने की बात कही जाती है, जो जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा को दर्शाता है।

शिक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में कई विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने महिला डिग्री इंजीनियरिंग कॉलेज की जर्जर स्थिति और श्यामा मुखर्जी कॉलेज में रिक्त पदों तथा पुस्तकालय संसाधनों की कमी का भी मुद्दा उठाया।

नीरा यादव ने सरकार से सभी योजनाओं और संस्थानों की समग्र समीक्षा कर जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारधारात्मक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राज्यहित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने सभी विधायकों से विकास और जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि बजट सत्र से जनता को अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की उम्मीद रहती है, इसलिए सरकार को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि विकास का लाभ वास्तविक रूप से लोगों तक पहुंच सके।

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