नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के इतर क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और क्रोएशिया के बीच संबंधों को और सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), नवाचार, स्टार्टअप और स्वच्छ ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के ठोस उपायों पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वार्ता सकारात्मक और परिणामोन्मुख रही। दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश को नई गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। खास तौर पर भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India–EU FTA) को शीघ्र अंतिम रूप देने और लागू करने की दिशा में मिलकर काम करने पर सहमति बनी। माना जा रहा है कि यह समझौता लागू होने पर भारत और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के साथ व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिसका लाभ क्रोएशिया को भी मिलेगा।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने क्रोएशिया में भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि की सराहना की। उन्होंने कहा कि इंडोलॉजी, योग और आयुर्वेद के प्रति क्रोएशियाई लोगों का आकर्षण दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम कर रहा है। दोनों नेताओं ने शिक्षा, शोध और लोगों के बीच संपर्क (पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट) बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 16 से 20 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है और इसे वैश्विक स्तर पर एआई सहयोग के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। यह अपनी तरह का दुनिया का चौथा बड़ा एआई सम्मेलन है। वैश्विक एआई संवाद की शुरुआत 2023 में ब्रिटेन के Bletchley Park में आयोजित एआई सुरक्षा शिखर सम्मेलन से हुई थी, जहां एआई की सुरक्षा, नैतिकता और नियमन पर व्यापक चर्चा की गई थी।
इसके बाद 2024 में दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में एआई सोल शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें नवाचार और तकनीकी साझेदारी पर जोर दिया गया। वर्ष 2025 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में एआई क्रियान्वयन शिखर सम्मेलन हुआ, जहां एआई के व्यावहारिक उपयोग और उद्योगों में इसके एकीकरण पर विचार-विमर्श किया गया।
नई दिल्ली में आयोजित मौजूदा समिट का उद्देश्य एआई को समावेशी विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक साझेदारी के साथ जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, जो तेजी से उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था और विशाल तकनीकी प्रतिभा का केंद्र है, वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मोदी–प्लेंकोविच वार्ता इस व्यापक संदर्भ में अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूती प्रदान करेगा।


