नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव की घोषणा कर दी है। आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इन सभी सीटों के लिए 26 फरवरी को अधिसूचना जारी की जाएगी, जबकि 16 मार्च को मतदान होगा। मतगणना और परिणामों की घोषणा भी उसी दिन की जाएगी।आयोग ने बताया कि जिन सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, उनके स्थान पर नए सदस्यों का निर्वाचन किया जाएगा। राज्यसभा, जिसे संसद का उच्च सदन माना जाता है, में सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और हर दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत यह चुनाव कराया जा रहा है।
किन राज्यों में कितनी सीटें
घोषित 37 सीटों में:
महाराष्ट्र – 7
ओडिशा – 4
तमिलनाडु – 6
पश्चिम बंगाल – 5
असम – 3
बिहार – 5
छत्तीसगढ़ – 2
हरियाणा – 2
हिमाचल प्रदेश – 1
तेलंगाना – 2
महाराष्ट्र (7 सीटें)
डॉ. भगवत किशनराव कराड, डॉ. (श्रीमती) फौजिया तहसीन अहमद खान, प्रियंका विक्रम चतुर्वेदी, शरदचंद्र गोविंदराव पवार, धैर्यशील मोहन पाटिल, रजनी अशोकराव पाटिल और रामदास बांदु आठवले का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
ओडिशा (4 सीटें)
ममता मोहंता, मुजिबुल्ला खान, सुजीत कुमार और निरंजन बिशी।
तमिलनाडु (6 सीटें)
एन.आर. एलंगो, पी. सेल्वारासु, एम. थम्बिदुरई, तिरुचि शिवा, डॉ. कनिमोझी एनवीएन सोमु और जी.के. वासन।
पश्चिम बंगाल (5 सीटें)
साकेत गोखले, रीताब्रत बनर्जी, बिकाश रंजन भट्टाचार्य, मौसाम नूर (05 जनवरी 2026 से रिक्त) और सुभ्रत बक्शी।
असम (3 सीटें)
रामेश्वर तेली, भुवनेश्वर कलिता और अजीत कुमार भुइयां।
बिहार (5 सीटें)
अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और हरिवंश नारायण सिंह।
छत्तीसगढ़ (2 सीटें)
कवि तेजपाल सिंह तुलसी और फूलो देवी नेताम।
हरियाणा (2 सीटें)
किरण चौधरी और राम चंदर जांगड़ा।
हिमाचल प्रदेश (1 सीट)
इंदु बाला गोस्वामी।
तेलंगाना (2 सीटें)
डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और के.आर. सुरेश रेड्डी।
राज्यसभा चुनाव संबंधित राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल हस्तांतरणीय मत से कराया जाता है। इन चुनावों के परिणाम संबंधित राज्यों की राजनीतिक गणित और दलगत स्थिति पर निर्भर करेंगे। राजनीतिक दलों ने संभावित उम्मीदवारों को लेकर अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि कुछ राज्यों में मुकाबला दिलचस्प हो सकता है, विशेषकर जहां विधानसभा में बहुमत का अंतर कम है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में आचार संहिता प्रभावी हो गई है।


