35 C
Kolkata
Wednesday, April 15, 2026

न्यायमूर्ति से नोक-झोंक मामले में अधिवक्ता महेश तिवारी को राहत, आपराधिक अवमानना समाप्त

रांची। झारखंड उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति राजेश कुमार के साथ नोकझोंक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अधिवक्ता महेश तिवारी के खिलाफ जारी आपराधिक अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी है। सोमवार को पांच जजों की पूर्ण पीठ ने अधिवक्ता की ओर से बिना शर्त माफी मांगे जाने को स्वीकार करते हुए अवमानना कार्यवाही समाप्त (ड्रॉप) करने का आदेश दिया।
पिछली सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी अदालत में उपस्थित हुए और अपने आचरण के लिए बिना शर्त माफी मांगी। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को सुनाए गए फैसले में पूर्ण पीठ ने माफी स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पूर्ण पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय, न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति राजेश शंकर भी शामिल थे।

दरअसल, न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत में एक मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी और न्यायामूर्ति राजेश कुमार के बीच नोकझोंक हो गई थी। इस घटना को उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लिया था। उस समय पूर्ण पीठ ने घटना से संबंधित वीडियो भी देखा था और अधिवक्ता से उनका पक्ष जानना चाहा था।

प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी ने कहा था कि उन्होंने उपरोक्त बातें न्यायाधीश से पूरी तरह होश में कही थीं और उन्हें इस पर कोई खेद नहीं है। इसके बाद पूर्ण पीठ ने संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था। अधिवक्ता ने इस नोटिस को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। हालांकि, बाद में अधिवक्ता द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के बाद उच्च न्यायालय ने इसे स्वीकार करते हुए अवमानना कार्यवाही समाप्त कर दी, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली।

Related Articles

नवीनतम लेख