नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को असम के दौरे पर जाएंगे और डिब्रूगढ़ जिले के मोरान बाईपास पर आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री गुवाहाटी में 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री 14 फरवरी को सुबह लगभग 10:30 बजे डिब्रूगढ़ के मोरान बाइपास स्थित आपातकालीन विमान उतरने की पट्टी (ईएलएफ) पर उतरेंगे। इसके बाद वहां लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों तथा हेलीकॉप्टरों के हवाई प्रदर्शन को देखेंगे। यह सुविधा पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह की पहली है, जिसे भारतीय वायुसेना के सहयोग से तैयार किया गया है। यह आपदा, प्राकृतिक संकट या सामरिक आवश्यकता के समय राहत और बचाव कार्यों में सहायक होगी। यहां 40 टन तक के लड़ाकू विमान और 74 टन तक के बड़े मालवाहक विमान उतर और उड़ान भर सकेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री लगभग एक बजे ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे। लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से बना यह छह लेन का विशेष ढांचे वाला पुल गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र का पहला ऐसा पुल है, जिससे दोनों स्थानों के बीच यात्रा समय घटकर लगभग सात मिनट रह जाएगा। भूकंप की संभावना को ध्यान में रखते हुए पुल में विशेष झटके सहने की तकनीक और पुल की स्थिति पर नजर रखने की स्वचालित व्यवस्था की गई है।
दोपहर करीब 1:30 बजे प्रधानमंत्री गुवाहाटी के लचित घाट पर 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें कामरूप जिले के अमिंगांव में स्थापित राष्ट्रीय डाटा केंद्र (पूर्वोत्तर क्षेत्र) भी शामिल है। 8.5 मेगावाट क्षमता वाला यह अत्याधुनिक डाटा केंद्र विभिन्न सरकारी विभागों की महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं को संचालित करेगा और अन्य राष्ट्रीय डाटा केंद्रों के लिए आपदा की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में भी काम करेगा। यह पहल डिजिटल भारत के संकल्प के अनुरूप पूर्वोत्तर क्षेत्र की सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था को मजबूत करेगी।
प्रधानमंत्री भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) गुवाहाटी का भी उद्घाटन करेंगे, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में उच्च शिक्षा और प्रबंधन शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ‘पीएम ई-बस सेवा योजना’ के तहत गुवाहाटी (100), नागपुर (50), भावनगर (50) और चंडीगढ़ (25) में कुल 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। इस पहल से चारों शहरों के 50 लाख से अधिक नागरिकों को स्वच्छ, सस्ती और विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलने की उम्मीद है।


