वाशिंगटन / नई दिल्ली — एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के विवादों के बीच खुद को उलझाना नहीं चाहता। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कश्मीर जैसे मसलों को दोनों देशों के बीच “प्रत्यक्ष विवाद” माना जाना चाहिए, और अमेरिका किसी तरह की मध्यस्थता थोपने का लक्ष्य नहीं रखता।
अधिकारी के मुताबिक, यदि कोई पक्ष अमेरिका से “सुविधा मुहैया कराने” की मांग करता है, तो वह विचार किया जा सकता है, लेकिन अमेरिका स्वेच्छा से तनावों के बीच हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान अमेरिकी प्रशासन पहले से ही विभिन्न संकटों से जूझ रहा है और उसकी विदेश नीति “America First” की धारणा पर आधारित है।
उन्होंने यह बयान उस समय दिया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच पहले ही मतभेद बढ़े हुए हैं और दोनों राष्ट्रों ने किसी तृतीय पक्ष की दखलअंदाजी को स्वीकार न करने की स्थिति रखी है।
अमेरिका का यह रुख उन लोगों के लिए एक संदेश माना जा रहा है, जो भारत-पाक के मामलों में इसके सक्रिय हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे थे। भारत ने भी पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा और सभी विवाद द्विपक्षीय रूप से ही सुलझाए जाने चाहिये।


