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Tuesday, March 3, 2026

रवि लामिछाने के केस वापस लेने का मामला नेपाल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

काठमांडू। पूर्व उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने के खिलाफ दर्ज संगठित अपराध और संपत्ति शुद्धिकरण (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले वापस लेने के महान्यायाधिवक्ता कार्यालय के निर्णय को रद्द कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता युवराज सफल ने आज महान्यायाधिवक्ता कार्यालय, महान्यायाधिवक्ता सबिता भंडारी, जिला सरकारी वकील कार्यालय काठमांडू, रूपन्देही, कास्की और चितवन को विपक्षी बनाते हुए यह मामला दायर किया है। याचिकाकर्ता सफल का कहना है कि जिस आरोप और मामले को स्वयं कार्यालय ने दायर किया था, उसे वापस लेने का निर्णय कानून के शासन को कमजोर और पराजित करने वाला है। उन्होंने महान्यायाधिवक्ता के फैसले को गैरकानूनी बताते हुए उसके कार्यान्वयन के लिए जारी निर्देशों को भी रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि कार्यालय संगठित अपराध और संपत्ति शुद्धिकरण से जुड़े अपराधों के अभियोग को कमजोर करने में लगा हुआ है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि रवि के खिलाफ आरोप वापस लेने के लिए जिस मुलुकी आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 2074 (धारा 36) का सहारा लिया गया है, वह भी कानून के विपरीत है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि जब अतिरिक्त साक्ष्य मिलने की कोई स्थिति नहीं थी, तब लिया गया यह निर्णय न केवल त्रुटिपूर्ण है, बल्कि धारा 36 का दुर्भावनापूर्ण उपयोग किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि महान्यायाधिवक्ता ने गैरकानूनी कार्य किया है।
याचिकाकर्ता ने संविधान की धारा 133(2) और (3) के अनुसार उत्प्रेषण, परमादेश और प्रतिशोध सहित उपयुक्त आदेश जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही संगठित अपराध और संपत्ति शुद्धिकरण से जुड़े मामलों को कमजोर करने वाले किसी भी कार्य या कार्रवाई से महान्यायाधिवक्ता को रोकने के लिए परमादेश जारी करने की भी मांग की गई है।

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