जयपुर। राज्य सरकार ने उड़ीसा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की खनन क्षेत्र की कार्यप्रणाली और सर्वोत्तम प्रथाओं (बेस्ट प्रेक्टिसेज) का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। खान, भूविज्ञान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकान्त ने बताया कि खान व भूविज्ञान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के तीन अलग अलग दल तीनों प्रदेशों में अध्ययन के लिए भेजे जा रहे है। उन्होंने बताया कि यह दल तीनों राज्यों में तकनीक का उपयोग, राजस्व वृद्धि और नियमों का अध्ययन कर राज्य सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
प्रमुख सचिव टी. रविकान्त ने बताया कि तीनों दल इन राज्यों के खनन रियायती नियमों, परिपत्रों, चारागाह व अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में खनन की अनुमतियों, पर्यावरण पूर्वानुमतियों आदि की प्रक्रियाओं व समय सीमा, अवैध खनन निगर्मन की रोकथाम के प्रावधानों, तकनीक के उपयोग के साथ ही राजस्व प्राप्ति की प्रक्रियाओं का अध्ययन करेगी। उन्होंने बताया कि अध्ययन दल को इन राज्यों की खनन क्षेत्र की बेस्ट प्रेक्टिसेज का भी अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं। यह दल प्रदेश के संदर्भ में अध्ययन रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करेंगे।
राज्य सरकार द्वारा तीनों राज्यों को भेजे जाने वाले दल में अधीक्षण खनि अभियंता स्तर के अधिकारी के साथ ही खनि अभियंता, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक और लेखा सेवा के अधिकारी का शामिल किया गया है। उड़ीसा के दल में अधीक्षण खनि अभियंता उदयपुर शिव प्रकाश शर्मा, खनि अभियंता नागौर जेपी गोदारा, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक सुशील कुमार और एएओ राजेश गर्ग को शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश के दल में अधीक्षण खनि अभियंता डीपी गौड़, खनि अभियंता बिजौलिया प्रवीण अग्रवाल, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक महेश शर्मा और एएओ जयपुर पवन शर्मा की टीम बनाई गई है। इसी तरह से छतीसगढ़ के दल में अधीक्षण खनि अभियंता भीलवाड़ा ओ पी काबरा, सहायक खनि अभियंता अलवर पुष्पेन्द्र जोधा, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक अमिताभ जगावत और एएओ भीलवाड़ा संजय लोहिया को शामिल किया गया है।
अधिकारियों की टीम उड़ीसा और मध्यप्रदेश के लिए रवाना हो गई है वहीं छत्तीसगढ़ जाने वाली टीम जनवरी के पहले सप्ताह में रवाना होगी। तीनों दलों से प्राप्त रिपोर्ट का राज्य सरकार स्तर पर विश्लेषण किया जाएगा और राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में उपयोगी सुझावों का परीक्षण कर निर्णय लिया जाएगा।


