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Monday, February 16, 2026

केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे

उखीमठ/रुद्रप्रयाग। ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम के कपाट इस वर्ष यात्रा के लिए 22 अप्रैल को वृष लग्न में प्रातः 8 बजे से श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इसका निर्णय महाशिवरात्रि के दिन परंपरानुसार शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में एक बैठक में पंचांग गणना के उपरांत लिया गया। रविवार काे ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में विद्वान आचार्यों, हक-हकूकधारियों तथा बदरी-केदार मंदिर समिति के पदाधिकारियों की उपस्थिति में केदारनाथ धाम के कपाट खाेलने की तिथि और समय तय किया गया। परंपरा के अनुसार निर्धारित तिथि से पूर्व बाबा केदार की पंचमुखी डोली केदारपुरी के लिए प्रस्थान करेगी।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी के अनुसार पंचमुखी डोली के प्रस्थान से पूर्व 18 अप्रैल को उखीमठ में भैरवनाथजी की पूजा-अर्चना होगी। 19 अप्रैल को डोली उखीमठ से फाटा के लिए प्रस्थान करेगी, 20 अप्रैल को गौरीकुंड में रात्रि प्रवास तथा 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी। इसके बाद 22 अप्रैल को प्रातः 8 बजे विधि-विधान से कपाट खोले जाएंगे। इस यात्रा वर्ष केदारनाथ धाम में एम.टी. गंगाधर मुख्य पुजारी का दायित्व संभालेंगे। मदमहेश्वर धाम के लिए शिवशंकर लिंग ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में पूजा व्यवस्था देखेंगे, जबकि पुजारी बागेश लिंग अतिरिक्त व्यवस्था में रहेंगे। महाशिवरात्रि के अवसर पर मुजफ्फरनगर निवासी अभिनव सुशील ने ओंकारेश्वर मंदिर को पुष्प सज्जा में सहयोग किया।

इस अवसर पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देश-विदेश के तीर्थयात्रियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए चारधाम यात्रा के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए समिति राज्य सरकार एवं प्रशासन के साथ समन्वय में कार्य कर रही है। मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने बताया कि कपाट तिथि घोषित होते ही यात्रा तैयारियों को गति दी जा रही है तथा मंदिर समिति के कार्यालयों एवं विश्राम गृहों का निरीक्षण जारी है। यात्रा प्रबंधन को लेकर प्रशासन और मंदिर समिति ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

घोषणा कार्यक्रम में केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कपरवाण, मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल, मंदिर समिति सदस्य, धर्माचार्य, वेदपाठी, हक-हकूकधारी एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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