कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को भारी हंगामे के बीच शुरू हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तीसरे कार्यकाल की सरकार का यह अंतिम बजट सत्र है। सत्र के पहले दिन राज्यपाल सीवी आनंद बोस हंगामे के कारण अपना पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ पाए। राज्यपाल दोपहर 12:30 बजे से कुछ पहले विधानसभा पहुंचे और अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान अध्यक्ष बिमान बनर्जी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थीं। सदन में प्रवेश के साथ ही नारेबाजी शुरू हो गई। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने “भारत माता की जय” के नारे लगाए, जिसके जवाब में तृणमूल विधायकों ने “जय बंगला” के नारे लगाए। लगातार शोरगुल के बीच राज्यपाल ने अपना संबोधन शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में उसे बीच में छोड़ दिया।
राज्यपाल ने मंत्रिमंडल द्वारा तैयार आठ पृष्ठों के भाषण में से केवल पहले तीन पृष्ठ पढ़े। ‘घाटाल मास्टर प्लान, जो केंद्र सरकार के कारण लंबे समय से रुका हुआ है…’ पंक्ति पढ़ने के बाद उन्होंने कहा, “मैं अब और नहीं पढ़ूंगा,” और आसन पर बैठ गए। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्यपाल की सराहना करते हुए कहा, “बहुत बढ़िया।”
विधानसभा सूत्रों के अनुसार, पूरे आठ पृष्ठों के भाषण में राज्य की विभिन्न परियोजनाओं की प्रशंसा के साथ एमजीएनआरईजीए को लेकर केंद्र पर आरोप भी शामिल थे, लेकिन राज्यपाल ने उन हिस्सों को नहीं पढ़ा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह 45 मिनट का भाषण सुनने आए थे, लेकिन राज्यपाल ने साढ़े चार मिनट में ही भाषण समाप्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाषण में बंगाल के ज्वलंत मुद्दों का उल्लेख नहीं था और केंद्र सरकार पर लगाए गए अनावश्यक आरोपों को राज्यपाल ने नजरअंदाज किया।


