काठमांडू । चीन से आयात होने वाली अधिकांश इलेक्ट्रिक गाड़ियों में गलत सूचना देकर अरबों रुपये की टैक्स चोरी किए जाने का खुलासा सरकार की तरफ से ऑडिट करने वाले महालेखा परीक्षक कार्यालय की रिपोर्ट में किया गया है। यह रिपोर्ट गुरुवार को राष्ट्रपति को सौंपी गई है। रिपोर्ट ने इन मामलों की जांच कर रकम वसूलने की सिफारिश की गई है।
राष्ट्रपति को सौंपी गई वार्षिक रिपोर्ट में नेपाल के महालेखा परीक्षक कार्यालय ने चीन से आयात किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों में मोटर पावर संबंधी विवरण में कथित हेरफेर कर अरबों रुपये के राजस्व छलने की आशंका जताई है। महालेखा परीक्षक कार्यालय की 63वीं वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि आधा दर्जन से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन आयातकों ने सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क से बचने के लिए कस्टम दस्तावेजों में पीक मोटर पावर का विवरण कम दिखाया या उसमें बदलाव किया।
सीमा शुल्क दर अधिनियम की अनुसूची-3 के अनुसार आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों पर उनकी पीक मोटर पावर के आधार पर 20 प्रतिशत या 30 प्रतिशत सीमा शुल्क तथा 15 प्रतिशत या 20 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ आपूर्तिकर्ताओं ने ऐसे चालान और कस्टम घोषणापत्र प्रस्तुत किए जिनमें मोटर पावर का विवरण वाहनों की वास्तविक क्षमता से अलग था, जिससे लागू कर दर कम हो गई।
महालेखा परीक्षक ने कहा कि इस तरह की विसंगतियां असेंबल और अनअसेंबल दोनों प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहनों में पाई गईं। रिपोर्ट में विशेष रूप से डीपल, जेएसी जे6, अवाटर 11 और एक्सपेंग जैसे वाहन मॉडलों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध कैटलॉग की समीक्षा से आयात के दौरान संभावित टैक्स चोरी का संकेत मिला है। निष्कर्षों के आधार पर रिपोर्ट ने इन वाहन आयातों से जुड़े 1.10 अरब रुपये के बकाया राजस्व की वसूली की सिफारिश की है।
इसी प्रकार रिपोर्ट में कहा गया है कि डोंगफेंग ब्रांड के वाहनों के आयात में 17 करोड़ 41 लाख रुपये के राजस्व छलने की संभावना है, जबकि एक्स30 एलईवी यात्री वैन के आयात से अतिरिक्त 9 करोड़ 80 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हुआ हो सकता है। रिपोर्ट ने इन मामलों की जांच कर रकम वसूलने की सिफारिश की गई है।

