कोलकाता । कोलकाता स्थित राष्ट्रीय पुस्तकालय ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस आयोजन की शुरुआत सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ के गायन से हुई, जिसने पूरे सभागार को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभा को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके वर्तमान युग में प्रासंगिक बने रहने की चर्चा की।
अरविंद भवन, कोलकाता के निदेशक विश्वजीत गांगुली ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को हमारे गौरवशाली अतीत और संस्कृति से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इतिहास और आज के समय के बीच पुल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर कई अन्य सम्मानित व्यक्तित्व भी मौजूद थे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और उसमें दिए गए बलिदानों को याद किया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों ने भी भाग लिया, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से इस आयोजन को और गरिमामय बना दिया। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदान को सहेजने और याद रखने की प्रेरणा दी।
सांस्कृतिक सत्र के दौरान देशभक्ति से ओत-प्रोत गीतों की प्रस्तुति दी गई। ‘मुक्ति के मंदिर के सोपान तले’ गीत को दिग्विजय चौधरी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने दिल से सराहा। अन्य प्रस्तुतियों ने भी सभी के हृदय में देशप्रेम जगाने का काम किया।
पूरे कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति की भावना का बोलबाला रहा। स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को श्रद्धांजलि देने और ‘वंदे मातरम्’ जैसे ऐतिहासिक गीत को केंद्र बिंदु बनाकर यह आयोजन नई पीढ़ी को राष्ट्रीय इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर सम्मानपूर्वक समझने व संजोने का महत्वपूर्ण संदेश देता हुआ समाप्त हुआ।

