नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार, 23 फरवरी को तेज गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 1300 अंक यानी 1.48% टूटकर 82,000 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि Nifty 50 में भी लगभग 350 अंकों (1.35%) की गिरावट रही और यह 25,350 के आसपास पहुंच गया। बाजार में यह कमजोरी मुख्य रूप से आईटी और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली के कारण देखने को मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, आईटी सेक्टर में आई गिरावट ने पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में दबाव के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे इंडेक्स पर नकारात्मक असर पड़ा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हालिया तकनीकी घटनाक्रम ने आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
दरअसल, गिरावट की बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic के ‘क्लॉड कोड’ टूल का नया अपडेट माना जा रहा है। यह टूल पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम, खासकर ‘कोबोल’ आधारित प्रोग्राम्स को तेज और कम लागत में मॉडर्नाइज करने की क्षमता रखता है। बाजार में इसे आईटी सर्विस कंपनियों के लिए संभावित चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब तक इस तरह के मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट्स से उन्हें बड़े पैमाने पर राजस्व मिलता रहा है।
कोबोल (COBOL) एक बेहद पुरानी लेकिन अब भी व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली प्रोग्रामिंग भाषा है। इसका उपयोग मुख्य रूप से बैंकों, सरकारी संस्थानों और बड़े कॉरपोरेट संगठनों के डेटा मैनेजमेंट तथा वित्तीय लेनदेन प्रणालियों में होता है। दुनिया भर के कई बैंकिंग सिस्टम और एटीएम नेटवर्क आज भी काफी हद तक इसी भाषा पर आधारित हैं। ऐसे में यदि एआई आधारित टूल्स इन प्रणालियों को तेजी से अपग्रेड करने में सक्षम हो जाते हैं, तो पारंपरिक आईटी सेवा प्रदाताओं के लिए यह प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ा सकता है।
बाजार जानकारों का कहना है कि फिलहाल निवेशक इस संभावित बदलाव के असर का आकलन कर रहे हैं। आईटी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट इसी आशंका का संकेत है कि भविष्य में बड़े मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट्स की प्रकृति बदल सकती है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि एआई टूल्स पूरी तरह से मानव विशेषज्ञता की जगह नहीं ले सकते और जटिल सिस्टम माइग्रेशन के लिए अभी भी आईटी कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
ऑटो सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना। वैश्विक संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के कारण व्यापक बिकवाली का माहौल बना रहा। फिलहाल निवेशकों की नजरें वैश्विक बाजारों के रुझान और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हैं, जो आगे की दिशा तय कर सकते हैं।


