जमशेदपुर । बर्मामाइंस स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML) में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार ‘Remaining Life Assessment’ (RLA-2026) का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के शीर्ष वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने औद्योगिक मशीनों और रक्षा उपकरणों की सुरक्षा और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने की उन्नत तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की।
पुराने होते औद्योगिक ढांचे और सुरक्षा की चुनौती
NML के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत के पेट्रो-रसायन, ताप विद्युत और खनन क्षेत्रों का लगभग 60 से 70 प्रतिशत बुनियादी ढांचा अपनी निर्धारित आयु सीमा पार कर चुका है।
RLA की भूमिका: किसी भी बड़ी औद्योगिक दुर्घटना को रोकने के लिए ‘शेष आयु आकलन’ (RLA) तकनीक अनिवार्य है, ताकि पुराने उपकरणों का सुरक्षित उपयोग जारी रखा जा सके।
रक्षा क्षेत्र में ‘रणनीतिक आवश्यकता’ है तकनीक
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और रक्षा विशेषज्ञ डॉ. जी सतीश रेड्डी ने मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और वायुयान प्रणालियों की मजबूती पर जोर दिया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:
आयु विस्तार: सुरक्षा से समझौता किए बिना लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की संरचनात्मक आयु बढ़ाना देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
AI का उपयोग: आरएलए (RLA) प्रक्रिया को अधिक सटीक और भविष्योन्मुखी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के समावेश की आवश्यकता है।
विद्युत घटक: उन्होंने सुझाव दिया कि मशीनों के साथ-साथ अब इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स की उम्र के आकलन पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
दिग्गजों का जमावड़ा
इस सेमिनार में देशभर से लगभग 150 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में टाटा स्टील, ONGC, IOCL, BPCL, NTPC और महिंद्रा रक्षा जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जो रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में NML के ऐतिहासिक योगदान को दर्शाता है।

