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Friday, February 6, 2026

दिल्ली स्थित झारखंड भवन में ठहरने के नियम पर सदन में सवाल, ऊर्जा विभाग गेस्ट हाउस पर भी उठे प्रश्न

रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन बुधवार को विपक्ष ने दिल्ली स्थित झारखंड भवन और ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस में ठहरने से जुड़े नियमों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। इसके साथ ही नल-जल योजना और अबुआ आवास से जुड़े मुद्दे भी सदन में उठे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड भवन में ठहरने से संबंधित नियमों को गलत बताते हुए कहा कि कैबिनेट निगरानी विभाग का यह निर्णय कि केवल विधायकों के सगे संबंधी ही झारखंड भवन में रह सकते हैं, उचित नहीं है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. रामेश्वर उरांव ने आलोक दूबे और लाल किशोर नाथ शाहदेव को ठहराने के लिए “संबंधी” बनाकर अनुशंसा की। मरांडी ने विधानसभा अध्यक्ष से पांच वर्षों का रजिस्टर मंगाने की मांग की, ताकि स्पष्ट हो सके कि झारखंड भवन में वास्तव में कौन-कौन ठहरता रहा है।
मरांडी ने कहा कि दिल्ली स्थित ऊर्जा विभाग के गेस्ट हाउस के लिए राज्य सरकार हर महीने पांच लाख रुपये किराया देती है, जहां, 8 स्टाफ तैनात हैं, 4–5 वाहन उपलब्ध हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस गेस्ट हाउस में अब तक कोई विधायक ठहरा भी है या नहीं? इसकी जानकारी के लिए इस गेस्ट हाउस के रजिस्टर, ठहरने वालों की सूची, संचालन व्यवस्था, पदस्थ इंचार्ज और आवंटन प्रक्रिया की जानकारी सदन के सामने लाने की मांग की। बाबूलाल मरांडी के सवालों पर राज्य के संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और सरकार इस पर गंभीरता से कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी निर्णय कैबिनेट की स्वीकृति के बिना नहीं लिया जा सकता और नेता प्रतिपक्ष की उठाई गई मांगों की जांच कराई जाएगी।

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