पाकिस्तान के योजना एवं विकास मंत्री अहसान इकबाल ने एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक बयान देते हुए कहा है कि चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) देश के लिए उस ‘गेम-चेंजर’ की भूमिका निभाने में असफल रहा, जैसा उसने होना चाहिए था।
इकबाल ने सार्वजनिक मंच पर कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ने CPEC की संभावनाओं का पूरा फायदा नहीं उठाया। उन्होंने खेल की भाषा में यह कहकर बात कही कि “हमने CPEC की कैच छोड़ दी है।”
उनका आरोप है कि पूर्व सरकार, खासकर इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ (PTI), ने चीनी निवेश को बदनाम करने की कोशिश की, जिससे कई चीनी निवेशक पाकिस्तान छोड़ गए और परियोजनाओं में धीमापन आया।
इकबाल ने यह भी कहा कि CPEC की दूसरी चरण की योजनाएँ — जिनमें चीन की उद्योगों का पाकिस्तान में स्थानांतरण और तेजी से औद्योगीकरण के माध्यम से निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य था — अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकीं।
उन्होंने आगे बताया कि CPEC के शीर्ष निर्णय-मंडल, यानी जोइंट कोऑपरेशन कमिटी (JCC), की कई बैठकें हुईं, लेकिन उत्पादकता और संवहनीय प्रगति 2017 के बाद सीमित रही।
मंत्री ने यह स्वीकार किया है कि जबकि CPEC से कुछ तात्कालिक लाभ हासिल हुए हैं, लेकिन दीर्घकालिक उद्देश्य — विशेष रूप से विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में निवेश आकर्षित करना और औद्योगिक आधार का विस्तार करना — अब तक पूरी तरह साकार नहीं हो पाए हैं।
उनके इस बयान को अशत्रिय रूप से गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह न सिर्फ पाकिस्तान में CPEC के महत्व पर सवाल उठाता है, बल्कि चीन-पाक संबंधों और बीआरआई (बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव) की उस रणनीति पर भी प्रतिबिंब है जिसके तहत यह परियोजना प्रारंभ की गई थी।
पाकिस्तान के भविष्य में CPEC 2.0 की योजनाओं और नए निवेश चरणों की संभावनाओं को देखते हुए, इकबाल की यह स्वीकृति राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर अहम मानी जाएगी — और यह संकेत देती है कि अब पाकिस्तान को इस रणनीतिक साझेदारी के दायरे और प्रभाव को फिर से मापने की जरूरत हो सकती है।


