हरिद्वार: धार्मिक नगरी हरिद्वार के हरकी पैड़ी पर ‘एक्स मुस्लिम पदयात्रा’ के आगमन से विवाद खड़ा हो गया है। यहां ब्रह्मकुंड पर इस यात्रा के पहुंचने और धर्म विशेष के प्रतीकों जैसे नाम और टोपी पहनने पर गंगा सभा के अध्यक्ष और तीर्थ पुरोहितों ने अपनी आपत्ति दर्ज की है। साथ ही, हरिद्वार के संत राम विशाल दास को लेकर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग: कुछ समय पहले गंगा सभा ने हरकी पैड़ी पर गैर–हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले बैनर लगाए थे। इसके बावजूद ‘एक्स मुस्लिम पदयात्रा’ का वहां तक पहुंचना विवाद का कारण बना है। इस यात्रा में हिंदू संगठनों से जुड़े लोग, साधु-संत, और संत राम विशाल दास भी शामिल रहे। 11 अप्रैल को बिजनौर से शुरू हुई यात्रा: यह पदयात्रा उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित गंगा बैराज से शुरू होकर हरिद्वार तक पहुंची। हरकी पैड़ी के पास यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर विशेष व्यवस्था की गई थी ताकि कोई तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न न हो। हालांकि, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद विरोध तेज हो गया। हरकी पैड़ी और सनातन धर्म को बदनाम करने का आरोप: गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने आरोप लगाया कि इस घटना का मकसद हरकी पैड़ी और सनातन धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे कृत्य को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए नहीं बर्दाश्त किया जाएगा। दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है। गंगा सभा ने नियमों को दोहराया: नितिन गौतम ने बताया कि हरकी पैड़ी के नियमों (बायलॉज) के अनुसार गैर–हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। उन्होंने संत राम विशाल दास पर सनातन धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए उनके बहिष्कार की मांग की और उन पर सख्त कानूनी कदम उठाए जाने की बात कही। पदयात्रा में धर्मांतरण का दावा: पदयात्रा के दौरान भाग लेने वाले लोगों ने दावा किया कि कई व्यक्तियों ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म को अपनाया है और वे हरकी पैड़ी पर पूजा-अर्चना करना चाहते थे। यात्रा शनिवार को श्यामपुर में रात्रि विश्राम करने के बाद रविवार को हरकी पैड़ी पहुंची, जो विवाद की वजह बनी।

