मुंबई/रांची: अगर आप भी गूगल पे , फोन पे या नेट बैंकिंग के जरिए धड़ल्ले से बड़े ट्रांजैक्शन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। ऑनलाइन धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक चौंकाने वाला ‘डिस्कशन पेपर’ जारी किया है। इसके तहत अब ₹10,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन में ‘देरी’ करने का प्रस्ताव रखा गया है।
क्या है RBI का नया प्रस्ताव?
RBI के नए प्रस्ताव के अनुसार, ₹10,000 से अधिक के डिजिटल लेन-देन अब ‘इंस्टेंट’ यानी तुरंत नहीं होंगे। इसमें 1 घंटे का होल्ड पीरियड शुरू करने का सुझाव दिया गया है।
पैसा कटेगा पर पहुंचेगा नहीं: आपके अकाउंट से पैसा तो कट जाएगा, लेकिन वह सामने वाले के खाते में 1 घंटे बाद जमा होगा।
रद्द करने का विकल्प: इस 1 घंटे के दौरान अगर आपको एहसास होता है कि आप किसी फ्रॉड का शिकार हुए हैं, तो आप उस ट्रांजैक्शन को रद्द कर पाएंगे।
ऐसा क्यों कर रहा है RBI?
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में डिजिटल धोखाधड़ी के करीब 28 लाख मामले सामने आए, जिनमें ₹22,931 करोड़ की चपत लगी।
चौंकाने वाली बात यह है कि कुल धोखाधड़ी की वैल्यू का 98.5% हिस्सा ₹10,000 से बड़े ट्रांजैक्शन का है।
जालसाज अक्सर ‘इमरजेंसी’ या ‘डर’ दिखाकर लोगों से तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। यह 1 घंटे की देरी उसी ‘जल्दबाजी’ को रोकने के लिए है।
‘किल स्विच’ और अन्य बड़े बदलाव
RBI ने केवल समय की देरी ही नहीं, बल्कि कुछ और सुरक्षा फीचर्स भी सुझाए हैं:
किल स्विच (Kill Switch): मोबाइल में एक ऐसा बटन होगा जिसे दबाते ही आपके सभी डिजिटल पेमेंट मोड (UPI, कार्ड, नेट बैंकिंग) एक साथ बंद हो जाएंगे।
सीनियर सिटीजन के लिए एक्स्ट्रा लेयर: 50,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर बुजुर्गों को अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति से भी अप्रूवल लेना पड़ सकता है।
सत्यापित मर्चेंट्स को छूट: राहत की बात यह है कि दुकानों पर किए जाने वाले भुगतान या ‘वेरिफाइड मर्चेंट्स’ के पेमेंट पर यह देरी लागू नहीं होगी।

