हिंदी फिल्म जगत की स्वर्णिम युग की जानी-मानी अभिनेत्री कामिनी कौशल का आज 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
प्रारंभ में उनका नाम उमा कश्यप था और उन्होंने अपनी शानदार करियर की शुरुआत 1946 में आई फिल्म नीचा नगर से की थी, जो कि कान्स फिल्म फेस्टिवल में पाम द’ओर जीतने वाली एक मायने में ऐतिहासिक फिल्म थी।
उनका करियर सात दशक से भी अधिक समय तक चला, जिसमें उन्होंने 1940-50 के दशक की शीर्ष हीरोइन के रूप में अपनी पहचान बनाई और बाद में चरित्र-भूमिकाओं में दमदार अभिनय किया।
उनकी यादगार फिल्मों में नदिया के पार, बिराज बहू, शहीद सहित अनेक प्रसिद्ध फिल्में शामिल हैं।
कौशल साहब ने 2022 तक पर्दे पर सक्रिय सहभागिता जारी रखी — उनकी आखिरी प्रमुख फिल्म हिन्दी सिनेमा की बहुचर्चित फिल्म लाल सिंह चड्ढा थी।
उनकी मृत्यु से हिंदी सिनेमा की एक युग-परंपरा विराम ले रही है और फिल्म-विश्व में शोक की लहर छा गई है।
उनकी निजी जीवन जटिलताओं के बावजूद, उन्होंने हमेशा सहजता एवं गरिमा के साथ अभिनय किया। आज हम उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें याद करते हैं और उनके परिवार को इस क्षति पर संवेदना प्रकट करते हैं।
कामिनी कौशल जी को श्रद्धांजलि — उनकी कला, उनका व्यक्तित्व व उनके द्वारा बने किरदार हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे।


