रांची: झारखंड राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। स्थिति यह है कि स्वीकृत 618 पदों में से अधिकांश खाली पड़े हैं। क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर कई महत्वपूर्ण पद रिक्त होने के कारण निगम का कार्यभार प्रभारी अधिकारियों के भरोसे किसी तरह चलाया जा रहा है।
बिहार के साथ संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब तक समाप्त नहीं हो पाया है। इस बीच पहले से नियुक्त कर्मचारी और अधिकारी सेवानिवृत्ति के कारण पद छोड़ चुके हैं। नतीजा यह है कि मौजूदा समय में राज्य के किसी भी जिले में निगम के जिला प्रबंधक या सहायक जिला प्रबंधक पद पर कोई नियोजन नहीं है। वर्तमान में जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को प्रभारी जिला प्रबंधक बनाकर काम चलाने की कोशिश हो रही है।
जिला प्रबंधक और सहायक जिला प्रबंधकों समेत कई पद खाली पड़े हैं।
जेएसएफसी के प्रबंध निदेशक सत्येंद्र कुमार ने स्वीकार किया है कि कर्मचारियों की भारी कमी से निगम जूझ रहा है। उनके अनुसार, जिला प्रबंधक और सहायक जिला प्रबंधक जैसे पद रिक्त हैं, जिनकी वजह से मौजूदा पदाधिकारियों को ही अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। गोदामों की देखरेख के कार्य का प्रबंधन भी जिला स्तर से किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने नई नियुक्ति और प्रोन्नति नियमावली पर काम तेज कर दिया है, जो अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 25 सालों से लंबित इस नियमावली को जल्द ही लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे निगम में कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी को पूरा किया जा सके। नई नियमावली में रिक्त पदों को भरने और आवश्यकतानुसार नए पदों के सृजन का भी प्रावधान होगा।
सूत्रों के अनुसार, झारखंड राज्य विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) की तर्ज पर झारखंड राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड अपनी जरूरतों के आधार पर खाली पदों को भरने की योजना बना रहा है। इसके लिए यह जेपीएससी या जेएसएससी पर निर्भर नहीं रहेगा। प्रबंध निदेशक सत्येंद्र कुमार ने जानकारी दी कि नई नियमावली को अप्रैल के पहले सप्ताह तक तैयार कर लिया जाएगा और इसे विभागीय सचिव के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे निगम की स्थिति में सुधार आएगा और वह अपनी कार्यक्षमता पुनः प्राप्त कर सकेगा।


