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Friday, March 13, 2026

आईआरजीसी की दुनिया को चेतावनी : ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ तो तेल और गैस में लगा दी जाएगी आग

तेहरान । अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का आज 14वां दिन है। इस युद्ध की लपटों से क्षेत्र में मौजूद ‘ तेल और गैस ‘ के भंडार पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान के सबसे ताकतवर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने आज चेतावनी दी कि यदि देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों पर हमला किया जाता है तो वह इस क्षेत्र के तेल और गैस को आग के हवाले कर देगा।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी ने दो-टूक कहा कि यदि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों पर हमला किया गया तो वह इस क्षेत्र के सभी तेल और गैस भंडार में आग लगा देगा। आईआरजीसी की इस चेतावनी से पहले गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा था कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य ( होर्मुज स्ट्रेट) को बंद नहीं करेगा। इससे पहले हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता चुने गए मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक बयान में कहा कि यह जलमार्ग “दबाव के एक हथियार” के रूप में बंद रहेगा।

मोजतबा का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से अपना चेहरा नहीं दिखा सकते। वह 28 फरवरी के हमले में बुरी तरह घायल हो चुके हैं। खास बात यह है कि मोजतबा खामेनेई के बयान को सरकारी टीवी में किसी और से पढ़वाया गया। सर्वोच्च नेता का चेहरा नहीं दिखाया गया।

आईआरजीसी की अहमियत की वजह

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को ईरान की सेना की सबसे ताकतवर और विशिष्ट शाखा माना जाता है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देश के इस्लामी शासन की सुरक्षा के लिए इसका गठन किया गया था। यह संगठन केवल एक सैन्य बल नहीं है, बल्कि ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में भी गहरा प्रभाव रखता है। ईरान में दो तरह की सेना है। पहली नियमित सेना है। इसे आर्टेश कहा जाता है। यह आमतौर पर सीमाओं की सुरक्षा करती है। दूसरी आईआरजीसी है। यह मुख्य रूप से सत्ता और क्रांति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह संगठन सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) के प्रति जवाबदेह है, न कि निर्वाचित सरकार के प्रति। आईआरजीसी के पास अपनी स्वयं की थल सेना, नौसेना और वायु सेना है। इसकी दो प्रमुख विशेष शाखा हैं। पहली कुद्स फोर्स और दूसरी बासिज। कुद्स फोर्स विदेशों में ईरान के अभियानों और मिलिशिया समूहों (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) का समर्थन करती है। बासिज अर्धसैनिक स्वयंसेवी बल है। इसका उपयोग देश के भीतर विरोध प्रदर्शनों को दबाने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए किया जाता है। 29 जनवरी 2026 को यूरोपीय संघ इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। इससे पहले अमेरिका भी इसे आतंकी समूह घोषित किया था।

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