दुबई/तेहरान | मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध का आज 24वां दिन है। इस युद्ध की तपिश अब ईरान और इजराइल की सीमाओं को लांघकर खाड़ी के अन्य देशों तक पहुँचने लगी है। सोमवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में एक बड़ा हादसा हुआ, जहाँ एक बैलिस्टिक मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से एक भारतीय नागरिक घायल हो गया।
अबू धाबी पर हमला और भारतीय नागरिक की स्थिति
अबू धाबी मीडिया ऑफिस के अनुसार, यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने राजधानी को निशाना बनाकर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस मिसाइल का मलबा अल शवामेख इलाके में गिरा, जिसकी चपेट में आने से एक भारतीय नागरिक को मामूली चोटें आईं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूत्रों पर भरोसा करने की अपील की है।
ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम और ‘ताकत से शांति’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध में कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान इस समय सीमा के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों (Power Plants) को तबाह कर देगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर फिर से अपना पुराना नारा दोहराते हुए लिखा— “ताकत के बल पर शांति (Peace Through Strength)!”
युद्ध के ताजा हालात: एक नजर में
इजराइल के ताबड़तोड़ हमले: इजराइली रक्षा बलों (IDF) ने सोमवार सुबह तेहरान में ईरानी शासन के बुनियादी ढांचे और सैन्य अड्डों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं।
ईरान की पलटवार की धमकी: ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी ‘फार्स’ ने खाड़ी देशों के 11 महत्वपूर्ण बिजली और पानी के संयंत्रों की सूची जारी की है, जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है। इसमें यूएई का बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी शामिल है।
मौतों का आंकड़ा: रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक इस युद्ध में ईरान में 1500, लेबनान में 1000 और अमेरिकी सेना के 13 जवानों सहित हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
वैश्विक चिंताएं और भारत का रुख
जंग के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है। वहीं, भारत में विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से इस संकट पर राजनयिक पहल करने और प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन के माध्यम से समाधान निकालने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।


