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Tuesday, March 17, 2026

ओलंपिक की राह पर भारत : साई के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बढ़ा रहे पदक की उम्मीदें

नई दिल्ली। भारत के 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के प्रयासों के बीच भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) देश में खिलाड़ियों के विकास की व्यवस्था को और मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में साई के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) और प्रशिक्षण केंद्रों से निकलने वाली नई पीढ़ी के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

साल 2019 में शुरू किया गया एनसीओई मॉडल खिलाड़ियों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया उच्च प्रदर्शन तंत्र है, जिसमें खेल विज्ञान, हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर और एथलीट मैनेजमेंट सिस्टम को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है। देशभर के एनसीओई केंद्रों में इस समय 4000 से अधिक खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि साई प्रशिक्षण केंद्रों (एसटीसी) में लगभग 4800 युवा खिलाड़ी खेलों की बुनियादी तैयारी कर रहे हैं।

हाल के वर्षों में इन केंद्रों से निकलने वाले खिलाड़ियों ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। भोपाल स्थित साई क्षेत्रीय केंद्र के खिलाड़ी मोहित एचएस और चंदूरा बॉबी पूवन्ना सुल्तान अजलान शाह कप में भारत की रजत पदक विजेता टीम का हिस्सा रहे। यह भारत की बढ़ती बेंच स्ट्रेंथ और नए खिलाड़ियों को अवसर देने की क्षमता को दर्शाता है।

मुक्केबाजी में भी साई केंद्रों का योगदान लगातार बढ़ रहा है। सोनीपत, गुवाहाटी और औरंगाबाद के एनसीओई केंद्रों के मुक्केबाज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल 2025 में मीनाक्षी ने स्वर्ण पदक और सवेती ने कांस्य पदक जीता, जबकि अभिनाश जमवाल और नवीन ने रजत पदक हासिल किए। वहीं गुवाहाटी में प्रशिक्षण ले रही ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने बॉक्साम एलीट इंटरनेशनल 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

पैरा खेलों में भी साई के केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गांधीनगर स्थित साइ एनसीओई पैरा खेलों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र बनकर उभरा है। ब्राजील ओपन चैंपियनशिप 2025 में जसप्रीत कौर ने रजत पदक जीता। वहीं ऑस्ट्रेलिया में आयोजित आईटीटीएफ वर्ल्ड पैरा फ्यूचर में भारतीय खिलाड़ियों ने दो स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक हासिल किए।

इसके अलावा पैरा यूथ एशियन गेम्स 2025 और फज्जा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में भी साई केंद्रों के खिलाड़ियों ने कई पदक जीतकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। एथलेटिक्स, वुशू, ताइक्वांडो, रोइंग और साइक्लिंग जैसे खेलों में भी साइ के विभिन्न केंद्रों से प्रशिक्षित खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं।

साई की यह संरचना केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी भारत की ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। एनसीओई और एसटीसी जैसे कार्यक्रम प्रतिभा की पहचान, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्रदान कर खिलाड़ियों को ओलंपिक स्तर के लिए तैयार कर रहे हैं।

इन केंद्रों में खिलाड़ियों को आवासीय प्रशिक्षण, शिक्षा सहायता, खेल विज्ञान की सुविधाएं और प्रतियोगिताओं में भागीदारी का अवसर बिना आर्थिक बोझ के दिया जाता है। आधुनिक जिम, रिकवरी पूल, विश्लेषण प्रणाली और वैज्ञानिक प्रशिक्षण सुविधाएं अब इन केंद्रों का सामान्य हिस्सा बन चुकी हैं।

क्षेत्रीय स्तर पर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी विश्वस्तरीय सुविधाओं तक पहुंच मिल रही है। भारत यदि 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी करता है, तो इन केंद्रों से तैयार होने वाले खिलाड़ी ही देश की पदक उम्मीदों को नई ऊंचाई दे सकते हैं। साई के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र आज भारत की ओलंपिक महत्वाकांक्षाओं की मजबूत नींव बनकर उभर रहे हैं।

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