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Monday, April 13, 2026

धरोहर और सुर: चित्तौड़ दुर्ग की यादें ताज़ा, जब आशा भोसले के भजनों से सराबोर हुआ था मीरा मंदिर।

चित्तौड़गढ़: प्ख्यात गायिका आशा भोसले के निधन े संगीत प्रेमियों को गहर शो डादिया है। जैसे ही यह दुखद समाचाफैला, हजारों लोग मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करने लगे। आशा भोसले क चित्तौड़गढ़ दुर्ग से विशेष है। दो बा इस ऐतिहासिक दुर्ग काौरा कर चुकी थीं—पहली बार करीब 52 साल पहले, अक्टूबर 1974 में, और दूसरी बार 2012 में। इन दोनों यात्राओं में उनक उप्थिति अप्याशित थीर किसी को पहले इसकी जारी नहीं थी चित्तौड़ दुर्ग के अंि किलेदार परिवार के सदस्य जयप्रकाश भटनागर ने किया कि एक सुबह करीब 9 बजे, जब वे अपने घर के मन गुनगुनी धूप का आनंद ले रहे थे, तभी एक बड़ी गाड़ी वहां से गुजरी। उस गाड़ी में आशा भोसले, उनकी बहन उषा मंगेशकर, उनके बेटे पायलट हेमंत भोसले और अन्य कुछ लोग मौजू थे जब गाड़ी व्यू पॉइंट पर रुक, तो भटनागर ने पहले उन्हें लता मंगेशकर समझ लिया और पूछा, क्यलता दीदी आई हैं? ड्राइवर ने इं दिया, लेकिन बार-बार पूछने पर उसने बताया कि गाड़ी में मौजूद व्यक्ति आशा भोसले हैं

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