चित्तौड़गढ़: प्रख्यात गायिका आशा भोसले के निधन ने संगीत प्रेमियों को गहरे शोक में डाल दिया है। जैसे ही यह दुखद समाचार फैला, हजारों लोग उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करने लगे। आशा भोसले का चित्तौड़गढ़ दुर्ग से विशेष नाता रहा है। वह दो बार इस ऐतिहासिक दुर्ग का दौरा कर चुकी थीं—पहली बार करीब 52 साल पहले, अक्टूबर 1974 में, और दूसरी बार 2012 में। इन दोनों यात्राओं में उनकी उपस्थिति अप्रत्याशित थी और किसी को पहले से इसकी जानकारी नहीं थी। चित्तौड़ दुर्ग के अंतिम किलेदार परिवार के सदस्य जयप्रकाश भटनागर ने साझा किया कि एक सुबह करीब 9 बजे, जब वे अपने घर के सामने गुनगुनी धूप का आनंद ले रहे थे, तभी एक बड़ी गाड़ी वहां से गुजरी। उस गाड़ी में आशा भोसले, उनकी बहन उषा मंगेशकर, उनके बेटे पायलट हेमंत भोसले और अन्य कुछ लोग मौजूद थे। जब गाड़ी व्यू पॉइंट पर रुकी, तो भटनागर ने पहले उन्हें लता मंगेशकर समझ लिया और पूछा, क्या लता दीदी आई हैं? ड्राइवर ने इंकार कर दिया, लेकिन बार-बार पूछने पर उसने बताया कि गाड़ी में मौजूद व्यक्ति आशा भोसले हैं।

