भारत में हाल-फिलहाल एक संगठित सुरक्षा-चिंता उजागर हुई है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक़ आतंकी संगठन के सरगना हाफिज़ सईद भारत के खिलाफ नया मोर्चा खोलने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह योजना बांग्लादेश को लॉन्च-पैड बनाकर क्रियान्वित कराने की दिशा में है।
साथ ही, देश की न्याय-प्रणाली को भी झटका लगा है — एक अतिरिक्त न्यायाधीश पर रिश्वत लेने के आरोप सामने आए हैं, और उस पर आरोपी के रूप में कार्रवाई प्रारम्भ हुई है क्योंकि कथित तौर पर उन्होंने मनचाहा फैसला सुनाने के लिए रिश्वत स्वीकार की थी।
इन दोनों घटनाओं को एक ही साथ देखने पर यह स्पष्ट है कि न केवल बाहरी सुरक्षा-खतरे सक्रिय हैं, बल्कि आंतरिक संस्थागत खामियों ने भी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाफिज़ सईद का मोर्चा खोलने का प्रयास, इधर न्यायाधीश पर आरोप — दोनों ही देश के लिए गंभीर संकेत हैं।
आगामी समय में देखना होगा कि सुरक्षा एजेंसियाँ इस साजिश तथा संस्थागत भ्रष्टाचार को कितनी कुशलता से नियंत्रित करती हैं। साथ ही, न्यायिक संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी जनता की निगाहें जमी हुई हैं।


