नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली की दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 14 आरोपितों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है। यह गिरोह म्यूल बैंक खातों (Mule Accounts) और गेमिंग ऐप्स का सहारा लेकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहा था। पुलिस ने इनके कब्जे से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और नकदी बरामद की है।
ऐसे हुआ बड़े गिरोह का खुलासा
दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी अमित गोयल के अनुसार, पुलिस की साइबर टीम संदिग्ध बैंक खातों के ट्रांजेक्शन का विश्लेषण कर रही थी। जांच के दौरान एक संगठित नेटवर्क का पता चला जो फर्जी निवेश योजनाओं और ‘पार्ट-टाइम जॉब’ के नाम पर लोगों को ठग रहा था। गिरोह की कार्यप्रणाली इतनी जटिल थी कि वे ठगी के पैसे को कई स्तरों पर अलग-अलग खातों में घुमाते थे, ताकि पुलिस उन तक न पहुँच सके।
कॉल सेंटर और गेमिंग ऐप का कनेक्शन
पुलिस ने जांच के दौरान लक्ष्मी नगर में चल रहे एक अवैध कॉल सेंटर पर भी छापा मारा। यहाँ ऑनलाइन बेटिंग (सट्टेबाजी) ऐप के नाम पर ठगी का खेल चल रहा था। गिरोह का मास्टरमाइंड मुकुल मलिक बताया जा रहा है, जो ‘हैंक’ नाम के एक अन्य अपराधी के संपर्क में था। ठगी की रकम का स्रोत छिपाने के लिए ये लोग गेमिंग अकाउंट्स का इस्तेमाल करते थे।
बरामदगी और गिरफ्तारी का विवरण
पुलिस की विशेष टीम ने नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद सहित कई इलाकों में छापेमारी कर आरोपितों को दबोचा। पकड़े गए लोगों में छात्र, डिलीवरी बॉय और टेली-कॉलर शामिल हैं।
गिरफ्तार मुख्य आरोपित: मोहम्मद फैज, मोहम्मद फहाद, सुवेब रब्बानी, सतेंद्र राठौर, शनी पाल, प्रीतम कुमार, अभिषेक मिश्रा और अभिषेक सिंह।
बरामद सामान:
28 मोबाइल फोन और 3 लैपटॉप।
23 एटीएम कार्ड और 17 पासबुक।
79 हजार रुपये नकद और 9 सिम कार्ड।
पुलिस की अपील: डीसीपी अमित गोयल ने आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या सिम कार्ड साझा न करें, क्योंकि इनका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस इस गिरोह से जुड़ी 15 अन्य शिकायतों की जांच कर रही है और नेटवर्क के बाकी सदस्यों की तलाश जारी है।

