हजारीबाग में बड़ी कार्रवाई: पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का पैतृक आवास जमींदोज
हजारीबाग | झारखंड के हजारीबाग जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव के आवास पर बुलडोजर चला दिया है। यह कार्रवाई जिले के केरेडारी प्रखंड के जोरदाग गांव में की गई है। इस घटना ने क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है।
क्यों हुई यह कार्रवाई ?
यह पूरी कार्रवाई एनटीपीसी (NTPC) की ‘चट्टी बारियातु कोल माइनिंग परियोजना’ के विस्तार से जुड़ी है। प्रशासन के अनुसार, योगेंद्र साव का यह घर उस भूमि पर बना था जिसे कोयला खनन परियोजना के लिए अधिग्रहित किया गया है।एनटीपीसी इस क्षेत्र में अपने खनन कार्यों का विस्तार कर रही है, जिसके लिए संरचनाओं को हटाना अनिवार्य बताया गया है।
प्रशासन और एनटीपीसी का रुख
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से ‘कानूनी और प्रक्रियात्मक’ बताया है। एनटीपीसी के वरीय अधिकारी नील माधव स्वाइन ने स्पष्ट किया कि घर और संबंधित संरचनाओं के मुआवजे की राशि पहले ही सरकारी खजाने में जमा की जा चुकी है। अधिकारियों का दावा है कि भवन हटाने के संबंध में सभी आवश्यक नोटिस और कानूनी औपचारिकताएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं। किसी भी संभावित विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
योगेंद्र साव के परिवार का विरोध और आरोप
पूर्व मंत्री के परिवार, विशेषकर उनकी पुत्री और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद, ने इस कदम का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अंबा प्रसाद का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या पर्याप्त समय दिए अचानक घर को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने इसे कंपनी की ‘मनमानी’ और ‘तानाशाही’ करार दिया है। अंबा प्रसाद ने यह भी जानकारी दी कि कार्रवाई के समय पूर्व विधायक निर्मला देवी को जबरन थाने में बैठा दिया गया था ताकि वे मौके पर विरोध न कर सकें। परिवार ने घोषणा की है कि वे इस ‘अन्यायपूर्ण’ कार्रवाई के खिलाफ फिर से न्यायालय (कोर्ट) का दरवाजा खटखटाएंगे।
गौरतलब है कि बड़कागांव और केरेडारी क्षेत्र में खनन परियोजनाओं को लेकर योगेंद्र साव का परिवार लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों के विस्थापन और उचित मुआवजे के मुद्दे पर मुखर रहा है।


