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Wednesday, February 4, 2026

झारखंड–ओडिशा सीमा के गांवों में हाथी का आतंक, ग्रामीण दहशत में

पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले के झारखंड–ओडिशा सीमावर्ती इलाके में एक हाथी का लगातार विचरण ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। यह हाथी समय-समय पर अपना ठिकाना बदलते हुए शहरी और ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में घुस रहा है। मंगलवार देर रात करीब 12 बजे हाथी ने एक बार फिर उत्पात मचाते हुए छह से अधिक गांवों में दहशत फैला दी और रात करीब दो बजे तक इलाके में घूमता रहा।
जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के तेंटूडी पोसी गांव निवासी ग्रामीण डाकवा वीरेंद्र बालमुचू ने बताया कि हाथी बूढ़ा खमण जंगल की ओर से निकलकर डौडगुवा, चिगली, बाइहातू, कूदाहातु, सोसोपी, तेंटूडी पोसी, जोड़ापोखर और कुंटुझोर गांवों में विचरण करता रहा। आधी रात को गांव में हाथी के घुसने से लोग नींद से जाग गए और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग डर के कारण घरों में दुबकने को मजबूर हो गए।
हाथी की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग सतर्क हो गए। ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हुए पारंपरिक हथियार, मशाल और तेज शोरगुल का सहारा लिया। काफी प्रयास के बाद हाथी को महिलीमुरूम जंगल की ओर खदेड़ा जा सका। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या अस्थायी रूप से टली है, क्योंकि हाथी रोजाना शाम ढलते ही फिर से आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार हाथी खेतों और सब्जी बागानों को रौंद रहा है और कई बार घरों में घुसकर धान, चावल समेत अन्य अनाज खा जाता है। इससे न केवल फसलों और संपत्ति को नुकसान हो रहा है, बल्कि लोगों की जान को भी खतरा बना हुआ है। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश है।
रमेश सैवाईया, लोको हो, मंगल भुईयां सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि जल्द से जल्द इस हाथी को पकड़ने या सुरक्षित क्षेत्र में भेजने की जरूरत है। उनका कहना है कि अगर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीण लगातार वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं ताकि क्षेत्र में भयमुक्त वातावरण बहाल हो सके।

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