देवघर | जिले में महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने और बच्चों के सुनहरे भविष्य की नींव रखने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी उद्देश्य के साथ उपायुक्त (DC) नमन प्रियेश लकड़ा और पुलिस अधीक्षक (SP) सौरव ने जिले के आला अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाना और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना रहा।
कानून की जानकारी ही है असली शक्ति
उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता तभी आएगी जब आम जनता को अपने अधिकारों और कानूनों की सही जानकारी होगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा:
विकास का माध्यम: कानून सिर्फ अपराधियों को दंड देने के लिए नहीं है, बल्कि यह विकास के लाभों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का एक सशक्त जरिया है।
सजगता जरूरी: महिलाओं को घरेलू हिंसा और युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए कानूनी जानकारी का प्रसार अनिवार्य है।
योजनाओं का लाभ पहुँचाने की हिदायत
डीसी ने समाज कल्याण और सामाजिक सुरक्षा विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं कि जिले की हर एक महिला को चिन्हित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक महिला और बच्चे तक पहुँचना चाहिए, ताकि विशेषकर आदिवासी समुदाय और आने वाली पीढ़ी स्वस्थ व सुरक्षित रह सके।
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर
देवघर के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं कठिन मजदूरी करने को विवश हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि ऐसी कार्यशालाओं और ठोस योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए। उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सजग किया जाए। सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग कर यह सुनिश्चित किया जाए कि लाभ बिचौलियों के बजाय सीधे लाभार्थियों तक पहुँचे।
प्रशासन की इस पहल से उम्मीद जगी है कि देवघर की महिलाएं न केवल सशक्त होंगी, बल्कि आने वाला कल बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और संभावनाओं से भरा होगा।

