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Wednesday, March 4, 2026

मेघा डेयरी संयंत्र के स्थानांतरण पर मानगो के ग्रामीणों में गहरा आक्रोश

पूर्वी सिंहभूम। झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मेघा दूध डेयरी परियोजना को लेकर मानगो के बालीगुमा सुखना बस्ती के लोगों को बड़ा झटका लगा है। लंबे समय से जिस 50 टीएलपीडी मेघा डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट के लगने की उम्मीद में ग्रामीण अपने क्षेत्र के विकास और रोजगार के सपने देख रहे थे, वह अब मानगो में नहीं बनेगा। राज्य सरकार ने इस प्लांट को सरायकेला-खरसावां जिले के तितिरबिला गांव स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है, जिस पर गत शुक्रवार को हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में अंतिम मुहर लगा दी गई। इस फैसले से सुखना बस्ती के ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश दोनों साफ दिखाई दे रहे हैं। एक दशक से अधिक समय से लोग इस परियोजना के जरिए रोजगार के अवसर, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और क्षेत्र के समग्र विकास की आस लगाए बैठे थे, लेकिन अब यह सपना टूटता नजर आ रहा है। प्लांट के स्थानांतरण की खबर मिलते ही स्थानीय लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों की इस पीड़ा को जानने भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह रविवार को प्रस्तावित प्लांट स्थल पर पहुंचे और लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरे मानगो क्षेत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। विकास सिंह ने याद दिलाया कि लगभग दस वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास और फिर सात मार्च 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की ओर से इसी स्थल पर मेघा डेयरी संयंत्र का भूमि पूजन किया गया था। दो-दो बार मुख्यमंत्री द्वारा भूमि पूजन होने से ग्रामीणों को पक्का भरोसा हो गया था कि प्लांट यहीं बनेगा और इससे क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी।
ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि जिस स्थान पर प्लांट प्रस्तावित था, वह एक खुला मैदान था, जहां स्थानीय लोग खेलकूद, व्यायाम और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते थे। प्लांट लगाने का सपना दिखाकर उस जमीन की घेराबंदी कर दी गई और अब वहां कोई विकास कार्य भी नहीं होने जा रहा है। विकास सिंह ने मांग की कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और स्थानीय लोगों के हित में सांसद और विधायक आगे आएं तथा विधानसभा और संसद में इस मुद्दे को मजबूती से उठाकर मेघा डेयरी संयंत्र को पूर्व में प्रस्तावित मानगो के सुखना बस्ती स्थल पर ही स्थापित करवाएं।
इस मौके पर डी. मिश्र, बांकीम महतो, असीम महतो, कामेश्वर महतो, षष्ठी महतो, इंद्रजीत महतो, संजय महतो, कमलेश तिवारी, नगेन्द्र महतो सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे।

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