रांची। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। रविवार तड़के से ही बीआईटी मोड़ स्थित दुर्गा मंदिर समेत थाना क्षेत्र के शिवालयों में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। क्या बच्चे,क्या बुजुर्ग, हर कोई महादेव की एक झलक पाने और जलाभिषेक करने के लिए घंटों कतार में अपनी बारी का इंतजार करता दिखा। पूरा मंदिर परिसर गेंदे के फूलों,पीले-लाल पर्दों और पारंपरिक सजावट से सराबोर था। धूप-दीप की सुगंध और ‘ओम नमः शिवाय’ के मंत्रोच्चार ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
इस अवसर पर बीआईटी मोड़ दुर्गा मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित आचार्य धनंजय मिश्रा ने बताया कि इस बार 151 किलो दूध का महारुद्राभिषेक किया गया है। साथ ही भक्तों को संबोधित करते हुए इस पर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं,बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का उत्सव है। आज के दिन महादेव और माता पार्वती का विवाह हुआ था,जो गृहस्थ जीवन और त्याग के संतुलन का प्रतीक है। बीआईटी मेसरा क्षेत्र में भक्तों का यह उत्साह दर्शाता है कि हमारी युवा पीढ़ी और समाज आज भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है। भोलेनाथ सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करें और लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें। मंदिर परिसर के बाहर सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम थे। भक्तों के लिए प्रसाद और शरबत का वितरण भी किया गया। मंदिर समिति के सदस्यों और स्थानीय निवासियों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया। वहीं शाम को होने वाले विशेष शिव बारात और आरती के लिए भक्तों में भारी उत्साह देखा गया।


