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Wednesday, March 4, 2026

कैबिनेट ने सिडबी को 5 हजार करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता को दी मंजूरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ाने और उद्यमों को कम लागत पर निधि उपलब्ध कराने को लेकर भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) को 5 हजार करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता प्रदान करने को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। कैबिनेट के फैसले के अनुसार वित्तीय सेवा विभाग द्वारा सिडबी में 5 हजार करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी तीन चरणों में डाली जाएगी। वित्त वर्ष 2025-26 में 3 हजार करोड़ रुपये की राशि 31 मार्च 2025 को निर्धारित 568.65 रुपये प्रति शेयर के पुस्तकीय मूल्य पर दी जाएगी। इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में 1,000-1,000 करोड़ रुपये की इक्विटी संबंधित वर्षों के 31 मार्च को निर्धारित पुस्तकीय मूल्य के आधार पर निवेश की जाएगी।
इक्विटी पूंजी निवेश के बाद सिडबी से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की संख्या वित्त वर्ष 2025 के अंत में 76.26 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2028 के अंत तक लगभग 1.02 करोड़ होने का अनुमान है। इस प्रकार लगभग 25.74 लाख नए उद्यम इस योजना से जुड़कर लाभान्वित होंगे। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के 30 सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार 6.90 करोड़ उद्यमों के माध्यम से लगभग 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। औसतन प्रत्येक उद्यम से 4.37 व्यक्तियों को रोजगार मिलता है। इस औसत के आधार पर नए लाभार्थियों के जुड़ने से लगभग 1.12 करोड़ अतिरिक्त रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
आगामी वर्षों में निर्देशित ऋण पर विशेष ध्यान और पोर्टफोलियो विस्तार के कारण सिडबी की जोखिम-भारित परिसंपत्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। डिजिटल तथा डिजिटल-सक्षम बिना जमानत ऋण उत्पादों और नवोदित उद्यमों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे उद्यम ऋण से भी जोखिम-भारित परिसंपत्तियां बढ़ेंगी, जिसके लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी। स्वस्थ पूंजी-जोखिम अनुपात बनाए रखना सिडबी की साख और ऋण श्रेणी को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है। चरणबद्ध रूप से की जाने वाली इक्विटी सहायता से सिडबी उच्च दबाव की स्थिति में भी पूंजी-जोखिम अनुपात को 10.50 प्रतिशत से ऊपर तथा नियामक मानकों के तहत 14.50 प्रतिशत से अधिक बनाए रखने में सक्षम रहेगा। इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रतिस्पर्धी दरों पर अधिक ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

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