रांची । असम की 126 विधानसभा सीटों पर गुरुवार को मतदान संपन्न हो गया। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 84.42% से अधिक भारी मतदान दर्ज किया गया है। झारखंड के राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई दे रही है, जहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) दोनों ने इस उच्च मतदान प्रतिशत को भाजपा सरकार के खिलाफ जनादेश बताया है।
“जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ दिया वोट” – कांग्रेस
झारखंड कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने असम के मतदान को ‘सत्ता बदलने वाला’ करार दिया। उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा भ्रष्टाचार का आरोप: असम की जनता 10 साल के भाजपा शासन और भ्रष्टाचार के मामलों से त्रस्त है। भाजपा ने असम की प्रेम और सद्भाव वाली संस्कृति को नुकसान पहुंचाया है। भारी मतदान यह दर्शाता है कि लोग अब कांग्रेस के नेतृत्व में टी-ट्राइब और मजदूरों की समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
“7-8 सीटों पर निर्णायक स्थिति में JMM” – सुप्रियो भट्टाचार्य
असम में 17 सीटों पर चुनाव लड़ रहे झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी अपने प्रदर्शन को लेकर बड़ा दावा किया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बहुत कम समय में असम में जो संगठन खड़ा किया, उसका असर जमीन पर दिख रहा है। पार्टी 07-08 सीटों पर निर्णायक स्थिति में है, जहां उनका सीधा मुकाबला भाजपा उम्मीदवारों से है। 2021 के मुकाबले अधिक वोटिंग प्रतिशत यह साफ करता है कि असम की जनता ने सत्ता उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है।
असम चुनाव के ये नतीजे न केवल राज्य, बल्कि झारखंड की राजनीति के लिए भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

