पूर्वी सिंहभूम। आधुनिक भारत के औद्योगिक इतिहास में प्रमथ नाथ बोस (पीएन बोस) का नाम उन महान व्यक्तित्वों में शामिल है, जिन्होंने अपने वैज्ञानिक ज्ञान, राष्ट्रवादी सोच और दूरदृष्टि से देश के विकास की मजबूत नींव रखी। भूविज्ञानी, शिक्षाविद और राष्ट्रचिंतक के रूप में उन्होंने जो योगदान दिया, उसका प्रभाव आज भी भारत के औद्योगिक ढांचे में स्पष्ट दिखाई देता है। विशेष रूप से जमशेदपुर में टाटा स्टील की स्थापना के पीछे उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
12 मई 1855 को बंगाल के गाइपुर में जन्मे पीएन बोस बचपन से बुधवार ही मेधावी छात्र थे।
भारत में लौह अयस्क, कोयला और अन्य खनिज संपदाओं की खोज और अध्ययन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने नर्मदा घाटी, रीवा, छोटानागपुर क्षेत्र और शिलांग पठार में व्यापक भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण किए। इसी दौरान उन्होंने मयूरभंज क्षेत्र में विशाल और उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क भंडार की खोज की।
इतिहासकारों का मानना है कि यदि पीएन बोस ने उस समय खनिज संपदा की वैज्ञानिक जानकारी और औद्योगिक संभावनाओं को सामने नहीं रखा होता, तो भारत में भारी उद्योगों का विकास काफी देर से होता। उन्होंने केवल खनिजों की खोज ही नहीं की, बल्कि यह भी समझाया कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए किस प्रकार किया जा सकता है।

