बिहार विधानसभा चुनाव के प्रारंभिक चरण में अब तक उम्मीदवारों व राजनीतिक दलों द्वारा ₹1,075 करोड़ से अधिक का खर्च हो चुका है।
इसमें उम्मीदवारों ने लगभग ₹525.60 करोड़ और राजनीतिक दलों ने करीब ₹250 करोड़ से अधिक खर्च किया है।
चुनाव आयोग ने प्रत्येक उम्मीदवार के खर्च की सीमा ₹40 लाख निर्धारित की थी, लेकिन इस मामले में खर्च उस सीमा को कहीं ऊपर चला गया है।
राज्य में कुल 45,341 बूथों पर मतदान होना है और इनमें प्रत्येक बूथ पर एक पोलिंग एजेंट तैनात किया जाएगा। इस पर प्रत्येक एजेंट पर करीब ₹5,000 तक खर्च होने का अनुमान है, जिससे कुल खर्च लगभग ₹22.67 करोड़ तक पहुंच रहा है।
मान्यता प्राप्त 12 दलों द्वारा औसतन 12-12 एजेंट की तैनाती को ध्यान में रखते हुए, पोलिंग एजेंटों पर करीब ₹272.60 करोड़ खर्च होने का अनुमान लगाया गया है, जबकि गैर-मान्यता प्राप्त दलों एवं अन्य उम्मीदवारों के भागीदारी से यह रकम लगभग ₹300 करोड़ तक हो सकती है।
इसके अलावा, इस चुनाव में प्रचार-प्रसार पर भी भारी खर्च देखने को मिल रहा है — इस बार करीब 14 हेलीकॉप्टरों का उपयोग और स्टार प्रचारकों की सभाओं पर पिछले चुनाव की तुलना में लगभग दोगुना खर्च अनुमानित है।
ऐसे में यह स्पष्ट है कि चुनाव प्रक्रिया में धनबल का प्रभाव और खर्च का स्तर इस बार बहुत ऊँचा रहा है — जो तय सीमा और निगरानी की कोशिशों के बावजूद सीमाओं को लांघ गया है।


