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Monday, April 13, 2026

बाबूलाल मरांडी ने रांची वन मंडल में करोड़ों की अनियमितता का लगाया आरोप, राज्यपाल से उच्च-स्तरीय जांच की मांग

रांची। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को लोक भवन में राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात की और रांची वन मंडल से संबंधित विभिन्न प्रकरणों के संदर्भ में ध्यान आकृष्ट कराते हुए एक ज्ञापन सौंपा।

बाबूलाल मरांडी ने ज्ञापन के माध्यम से उक्त प्रकरणों की उच्चस्तरीय जांच एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराए जाने के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह किया है। साथ ही राजधानी रांची वन मंडल के तत्कालीन प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) राजीव लोचन बख्शी (आईएफएस) पर गंभीर वित्तीय घोटाले का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से उनके कार्यकाल में हुए घोटाले, प्रशासनिक कदाचार एवं राजकोष की सुनियोजित लूट की उच्चस्तरीय जांच एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है ।

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में बाबूलाल मरांडी ने लिखा, ” राज्य के जागरूक नागरिक होने के नाते यह सूचित करना मेरा कर्तव्य है कि राजीव लोचन बख्शी की कार्यशैली सदैव नियमों के संरक्षण के बजाय सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर उच्च स्तर पर ‘विशिष्ट सेवा-प्रदाता’ की रही है।”

बाबूलाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि अपनी इसी विशेषता के कारण वे वर्तमान मुख्यमंत्री के अत्यंत निकट बने हुए हैं और इसी राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठाकर अपने कार्यकाल के काले कारनामों को दबाए रखने में सफल रहे हैं। यदि निष्पक्ष जांच समय पर हुई होती तो मात्र रांची वन प्रमंडल में उनके कार्यकाल में किए गए घोर भ्रष्टाचार के कारण वे आज जेल की सलाखों के पीछे होते। विडंबना यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद वे वर्तमान में सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के सर्वेसर्वा बने हुए हैं। जहां वे अपनी भ्रष्ट कार्यप्रणाली को निर्बाध रूप से जारी रखे हुए हैं।

बाबूलाल मरांडी ने अपने ज्ञापन में झारखंड महालेखाकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्यपाल को अवगत कराया है। उन्होंने लिखा है कि महालेखाकार द्वारा 95 मस्टर रोल्स की प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि झारखंड कोषागार संहिता के नियम 242-243 का घोर उल्लंघन कर 1.0383 करोड़ का संदिग्ध भुगतान किया गया है। इन मस्टर रोल्स पर न तो मजदूरों के हस्ताक्षर हैं, न अंगूठे के निशान, बल्कि इनमें ‘व्हाइटनर’ और ‘इरेजर’ लगाकर रिकॉर्ड के साथ आपराधिक छेड़छाड़ की गई है। मजदूरों को भुगतान बैंक खातों के बजाय नकद दिखाया गया, जो कि सरकारी निर्देशों की सीधी अवहेलना है।

बाबूलाल ने दावा किया है कि यह तो मात्र 95 मस्टर रोल्स की बानगी है। राजीव लोचन बख्शी के पूरे कार्यकाल में हजारों ऐसे मस्टर रोल्स के माध्यम से करोड़ों रुपये की लूट की प्रबल आशंका है, जिसकी सघन फॉरेंसिक जांच अत्यंत आवश्यक है। स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच और फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश होना चाहिए।

बाबूलाल ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में महालेखाकार के ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी को भी संलग्न कर प्रमाणिकता के लिए भेजा है। उन्होंने राजीव लोचन बख्सी के प्रशासनिक कदाचार का दूसरा उदाहरण ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में हुई गड़बड़ी को लेकर दिया है। उन्होंने कहा ग्रामीण विद्युतीकरण के प्रस्तावों को नियम विरुद्ध आठ खंडों में विभाजित कर दिया गया वो इसलिए किया ताकि 7.35 हेक्टेयर वन भूमि के अपयोजन का आदेश वे स्वयं डीएफओ स्तर पर दे सकें और इसे राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकार के पास न भेजना पड़े।

मरांडी ने कहा कि इस कृत्य के माध्यम से बख्शी ने यूजर एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाया और सरकार को न्यूनतम 46.01 लाख की एनपीवी राशि के राजस्व की सीधी क्षति पहुंचाई है। ऑडिट टीम की ओर से पूछताछ किए जाने पर उन्होंने सदैव की तरह केवल टालमटोल भरा रवैया अपनाया है। इसके अलावा सीएएमपीए मद के तहत अंतर्गत रेंजर्स को दिए गए 8,53,40,488 के अग्रिम का लेखा-जोखा जानबूझकर ऑडिट टीम से छिपाया गया, ताकि इस भारी राशि के व्यय की जांच न हो सके।

उन्होंने कहा कि इस राशि का कहां और कैसे उपयोग हुआ, इसका कभी भौतिक सत्यापन नहीं हो सका है। इसके अतिरिक्त, 1.80 करोड़ की सामग्री खरीद के मूल वाउचर ऑडिट में उपलब्ध ही नहीं कराए गए और यह भ्रामक तर्क दिया गया कि वे महालेखाकार को भेज दिए गए हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से राजीव लोचन बख्शी के रांची वन प्रमंडल के पूरे कार्यकाल की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच एवं फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश देने का आग्रह किया है।

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