उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में जारी हुए बिहार विधानसभा चुनाव के एग्जिट-पोल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बढ़त दिखाई जाने को एक राजनीतिक साजिश करार दिया है।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ये एग्जिट-पोल “केवल भूमिका” तैयार करने के लिए हैं, ताकि आगे चुनाव प्रक्रिया में बेईमानी करना आसान हो जाए। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्हें और जनता को स्वीकार करना होगा कि कुछ चुनावों में ऐसी घटनाएँ हुई हैं।
अखिलेश ने उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में भी ऐसे सर्वे दिखाए गए थे जिसमें उनका नाम बढ़ा हुआ था, लेकिन परिणाम में उसके अनुरूप बदलाव नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि मीडिया एवं एनडीए मिलकर नैरेटिव सेट कर रहे हैं, ताकि वास्तविक चुनाव-परिस्थितियों पर सवाल उठाना संभव न हो।
उन्होने आगे कहा कि इस तरह के एग्जिट-पोल से जनता का ध्यान ‘महंगाई, बेरोज़गारी व अन्य सामाजिक मुद्दों’ से हटकर केवल चुनावी शोर-शराबे में चला जाता है। उन्होंने इस अवसर पर चुनाव आयोग व अन्य निगरानी एजेंसियों से इन सर्वेक्षणों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की माँग की है।
इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक इस रूप में देख रहे हैं कि विपक्ष अब चुनाव पूर्व व रुझान-सर्वेक्षणों के निष्पक्षता-प्रश्नों को सार्वजनिक मंच पर उठा रहा है, जिससे आने वाले परिणामों का आधिकारिक स्वरूप भी प्रभावित हो सकता है।


