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Wednesday, February 25, 2026

एआईयू ने डोप टेस्ट से भागने पर पूजा आत्माराम पर लगाया तीन साल का प्रतिबंध

नई दिल्ली। भारतीय लंबी दूरी की धाविका पूजा आत्माराम पर एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (एआईयू) ने डोप टेस्ट से बचने के मामले में तीन साल का प्रतिबंध लगा दिया है। एआईयू ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि खिलाड़ी ने आधिकारिक सूचना मिलने के बावजूद सैंपल देने से इनकार किया और डोपिंग कंट्रोल प्रक्रिया के दौरान वहां से भाग गईं, जिसके कारण उनका नमूना एकत्र नहीं किया जा सका।

एआईयू के अनुसार यह घटना 23 नवंबर 2025 को मुंबई में आयोजित इंडियन ऑयल डब्ल्यूएनसी नेवी हाफ मैराथन के बाद हुई। पूजा आत्माराम ने इस प्रतियोगिता में जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें नियमित प्रक्रिया के तहत डोप टेस्ट के लिए चुना गया। रेस समाप्त होते ही डोपिंग कंट्रोल अधिकारी ने उन्हें मौखिक रूप से परीक्षण के लिए सूचित किया। हालांकि, एआईयू के बयान के मुताबिक उन्होंने डोपिंग कंट्रोल फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं किए।

फैसले में आगे कहा गया है कि खिलाड़ी को चैपरॉन के साथ डोपिंग कंट्रोल स्टेशन ले जाया जा रहा था। इसी दौरान वह अचानक विपरीत दिशा में दौड़ पड़ीं और भीड़ में गायब हो गईं। चैपरॉन ने उनका पीछा करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण वह नजरों से ओझल हो गईं। इसके बाद डोपिंग कंट्रोल अधिकारी और रेस डायरेक्टर ने फोन पर संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अंततः सैंपल एकत्र करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

एआईयू ने 3 फरवरी 2026 को पूजा आत्माराम के खिलाफ औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की। 9 फरवरी को उन्होंने एआईयू को लिखित माफी भेजी। इसके बाद 17 फरवरी को उन्होंने एंटी-डोपिंग नियम उल्लंघन स्वीकार करते हुए परिणामों को मानने का आधिकारिक फॉर्म जमा किया। नियमों के अनुसार डोप टेस्ट से बचना या सैंपल देने से इनकार करना भी एंटी-डोपिंग उल्लंघन की श्रेणी में आता है, जिसके लिए अधिकतम चार साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

प्रारंभिक तौर पर एआईयू ने चार साल के प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, खिलाड़ी द्वारा गलती स्वीकार करने और जांच में सहयोग करने को ध्यान में रखते हुए एक वर्ष की छूट दी गई। इसके परिणामस्वरूप उन पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया। यह निलंबन 3 फरवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा।

इसके साथ ही 23 नवंबर 2025 और उसके बाद के उनके सभी प्रतिस्पर्धात्मक परिणाम रद्द कर दिए गए हैं। इसका मतलब है कि नेवी हाफ मैराथन में उनकी जीत भी आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दी जाएगी। 30 वर्षीय पूजा आत्माराम मुख्य रूप से 5000 मीटर और 10,000 मीटर स्पर्धाओं में भाग लेती रही हैं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सक्रिय रही हैं।

एआईयू ने अपने फैसले में दोहराया कि डोपिंग नियंत्रण प्रक्रिया से बचना खेल की निष्पक्षता के खिलाफ गंभीर उल्लंघन है और इससे एथलेटिक्स की साख पर असर पड़ता है। यह फैसला एक बार फिर स्पष्ट करता है कि अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर एंटी-डोपिंग नियमों के पालन को लेकर सख्ती बरती जा रही है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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