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Wednesday, March 29, 2023

कृषि शुल्क कृषकों के लिए नहीं अधिकारियों के लाभ के लिए: चैंबर

रांची: झारखण्ड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2022 के विरोध में जारी राज्यव्यापी आंदोलन के दूसरे दिन भी प्रदेश में खाद्य वस्तुओं की आवक-जावक एवं कृषि संबंधी थोक व्यवसाय की दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। झारखण्ड चैंबर के आहवान पर राइस मिल्स, फ्लाॅवर मिल्स सहित अन्य खाद्य संबंधित मैनुफैक्चरिंग प्लांट में भी सेल बंद रहा। फल एवं सब्जी की थोक दुकानों के साथ ही आलू प्याज थोक विक्रेता संघ, रांची की देखरेख में पूरे झारखण्ड में आलू-प्याज की थोक मंडियां भी बंद रहीं। झारखण्ड चैंबर ऑफ काॅमर्स और रांची चैंबर पंडरा के पदाधिकारियों ने दिन के समय अपर बाजार और चुटिया क्षेत्र का दौरा कर बंद का जायजा लिया। शाम को चैंबर भवन में पूरे राज्य में की गई बंद की समीक्षा के लिए सभी जिला चेंबर, खाद्यान्न व्यवसायी संघ और फूड प्रोसेसिंग संचालकों के साथ ऑनलाइन समीक्षात्मक बैठक कर, आगे की रणनीतियों पर वार्ता की गई।

बाजार क्षेत्र का दौरा करने के बाद चैंबर भवन में भी खाद्यान्न व्यापारियों की एक बैठक हुई। यह कहा गया कि वर्तमान में बाजार शुल्क लागू नहीं होने से किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो रहा है किंतु जैसे ही कृषि उपज पर यह शुल्क लागू हो जायेगा, उत्पाद का बाजार मूल्य कम मिलेगा, ऐसे में किसानों की आय बढने के बजाय घटेगी। गलत अनुमान लगाकर इस विधेयक को लाया जा रहा है किंतु वास्तविकता में यह किसानों के साथ ही उपभोक्ता, व्यापारी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के हित में नहीं है। चूंकि उपभोक्ताओं को अधिकतम चीजें एमआरपी के रूप में मिलती हैं, उनपर पडनेवाले भार को उपभोक्ताओं को समझ में आने में काफी दिक्कतें होती हैं। मंत्री इस बात को कभी नहीं कहेंगे कि जब ये टैक्स लगेगा और उत्पादों की लागत बढेगी तो यहां के उत्पाद का एमआरपी भी बढाया जायेगा जो कि टैक्स के रूप में उपभोक्ता को नहीं दिखेगा।

रांची चैंबर पंडरा के अध्यक्ष संजय माहुरी ने कहा कि वस्तुस्थिति यही है कि महंगाई का अतिरिक्त भार उपभोक्ताओं पर सीधे सीधे पड रहा है। क्योंकि व्यवसायी इस शुल्क का भुगतान उपभोक्ताओं से लेकर ही करेंगे। इस विधेयक में कृषि आधारित उद्योग के साथ किसानों और उपभोक्ताओं को बहुत बडी हानि होगी, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। इस शुल्क से जो लोग पूर्व में लाभान्वित होते रहे हैं, केवल उनके हितों के लिए कृषि मंत्री गलत वक्तव्य दे रहे हैं। ऐसे भ्रमात्मक ब्यान देकर अपनी जिम्मेवारियों से दूर हट जाना किसी राज्य के एक विभाग के मुखिया के रूप मे काम कर रहे मंत्री की उदासीनता दर्शाती है।

चैंबर अध्यक्ष किशोर मंत्री ने कडी नाराजगी जताते हुए कहा कि कृषि मंत्री द्वारा केंद्र सरकार के कानून का हवाला देकर राज्य में कृषि उपज, वन उपज और पशुधन पर शुल्क लगाया जा रहा है। लेकिन झारखण्ड मेें इस विधेयक में संशोधन करते हुए कुछ ऐसी बातों को निहित किया गया है एवं कई ऐसे प्रावधान हैं जो व्यापारियों और किसानों को दिन प्रतिदिन परेशान करेंगे। शुल्क के विरोध में झारखण्ड के व्यवसायी एकजुट हैं, यदि कृषि मंत्री द्वारा जल्द तत्परता नहीं दिखाई गई तब राज्य में जल्द ही खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होगी। हमारा आंदोलन इस बात का संकेतक है कि हम व्यापारी केवल अपने व्यापार की ही नहीं उपभोक्ता के हितों के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। इस आंदोलन को लेकर कृषि मंत्री कुछ भी ब्यान दें किंतु वास्तविकता यही है कि उनके सहयोगी मंत्री और उनकी पार्टी के शीर्ष नेता चिंता में हैं।

चैंबर महासचिव डाॅ अभिषेक रामाधीन ने कहा कि कृषि शुल्क कृषकों के लाभ के लिए नहीं बल्कि अधिकारियों के लाभ के लिए लगाया जा रहा है, जिसका हम विरोध करते हैं। यदि किसानों के लाभ के लिए यह विधेयक है तो कृषि मंत्री आंकडा बतायें कि कैसे किसानों को लाभ होगा। इस विधेयक के प्रभावी होने से शहर से लेकर गांव, देहात, प्रखंड स्तर तक शोषण बढ़ेगा। जब तक विधेयक वापस नहीं लिया जाता तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

अनिश्चितकालीन खाद्यान्न व्यापार बंद के दूसरे दिन राजधानी रांची के अलावा दुमका, चाईबासा, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, जमशेदपुर, हजारीबाग, रामगढ, चतरा, बोकारो, धनबाद, कोडरमा, गिरिडीह, दुमका, देवघर, गोड्डा, साहेबगंज, पाकुड, जामताडा, पलामू, गढ़वा, लातेहार में भी कृषि संबंधी थोक व्यवसाय की दुकानें एवं कृषि मंडियां बंद रहीं। व्यवसायियों को प्रोत्साहित करने के लिए चैंबर के पूर्व अध्यक्ष मनोज नरेडी ने हजारीबाग जाकर व्यवसायियों को प्रोत्साहित किया।

चैंबर भवन में आहूत बैठक में अध्यक्ष किशोर मंत्री, उपाध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, अमित शर्मा, महासचिव डाॅ0 अभिषेक रामाधीन, सह सचिव रोहित पोद्दार, शैलेष अग्रवाल, कार्यकारिणी सदस्य परेश गट्टानी, राम बांगड, नवीन अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष प्रवीण जैन छाबडा, रांची चैंबर पंडरा के अध्यक्ष संजय माहुरी, जेसीपीडीए अध्यक्ष संजय अखौरी, आलू-प्याज थोक विक्रेता संघ के अध्यक्ष मदन साहू, रोहित कुमार, अनिल अग्रवाल, विवेक अग्रवाल, महेंद्र जैन, राकेश जैन, सुभम अग्रवाल, अशोक खेमका, संजय दलानिया, संजय बागला, सुजीत चौधरी, संजय बडजात्या, अभिषेक अग्रवाल, मनोज छापडिया, गौरीशंकर शर्मा के अलावा पंडरा बाजार के सैकडों खाद्यान्न व्यापारी उपस्थित थे।

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