लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद 5 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में मजबूत वापसी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 899.71 अंक यानी 1.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 80,015.90 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 285.40 अंक या 1.17 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,765.90 के स्तर पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बाजार में यह रिकवरी देखने को मिली। खासकर फाइनेंशियल और कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।
निचले स्तरों पर खरीदारी से मिली ताकत
बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण हाल की गिरावट के बाद निचले स्तरों पर हुई खरीदारी रहा। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही थी, जिसके चलते कई मजबूत कंपनियों के शेयर आकर्षक स्तरों पर आ गए थे। इसी का फायदा उठाते हुए निवेशकों ने रियल्टी, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में जमकर खरीदारी की। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे “वैल्यू बाइंग” कहा जाता है, जिसमें निवेशक गिरावट के दौरान अच्छे शेयरों को कम कीमत पर खरीदने का मौका तलाशते हैं।
वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत
भारतीय बाजार की तेजी में वैश्विक संकेतों की भी अहम भूमिका रही। एशियाई बाजारों में बढ़त देखने को मिली, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार भी पिछली रात मजबूती के साथ बंद हुए थे। इससे घरेलू निवेशकों का भरोसा बढ़ा और बाजार में खरीदारी का माहौल बना। इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिले कि ईरान संभावित युद्ध टालने के लिए बातचीत को तैयार हो सकता है। इससे पश्चिम एशिया में बढ़ रहे तनाव को लेकर निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई और बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ।
बाजार में घटी अस्थिरता
शेयर बाजार में अस्थिरता भी कम होती नजर आई। निवेशकों के डर और बाजार की अनिश्चितता को दर्शाने वाला सूचकांक India VIX करीब 10 प्रतिशत गिरकर 19.04 के स्तर पर आ गया। विशेषज्ञों के अनुसार VIX में गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार में घबराहट धीरे-धीरे कम हो रही है। हालिया भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा वापस लौटता दिखाई दे रहा है।
आगे कैसा रह सकता है बाजार
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगी। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर रहती है और घरेलू निवेश जारी रहता है, तो बाजार में सकारात्मक रुख बना रह सकता है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सतर्कता के साथ निवेश करें और लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं।


