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Tuesday, March 3, 2026

मप्र के उज्जैन में मकर संक्रांति पर भगवान महाकाल का तिल के तेल से हुआ अभिषेक

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में गुरुवार को मकर संक्रांति पर्व का धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान महाकाल को तिल अर्पित किए गए। मकर संक्रांति पर्व पर भी सबसे पहले बाबा महाकाल का तिल के तेल से स्नान कराकर अभिषेक किया गया और फिर तिल्ली के लड्डू और पकवानों का भोग लगाया गया।
महाकाल मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी दोपहर 3:05 बजे से हुआ, लेकिन पर्व काल आज से था, इसीलिए यह पूजन आज किया गया। उज्जैन में किसी भी पर्व की शुरुआत बाबा महाकाल के दर से होती है। इसी परंपरा के चलते मकर संक्रांति पर्व भी सबसे पहले बाबा महाकाल के मंदिर में मनाया गया। तड़के चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का पूजन कर तिल के उबटन से भगवान महाकाल का स्नान गया। इस दौरान दूध, दही, घी, शक्कर, फलों और तिल के तेल से बने पंचामृत से भगवान का पूजन-अर्चन किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम के साथ जल अर्पित किया गया।
कपूर आरती के बाद जटाधारी भगवान महाकाल को मस्तक पर रजत चंद्र, भांग, चंदन और गुलाब के फूलों की माला अर्पित की गई। इसके बाद बाबा महाकाल का रजत मुकुट और त्रिपुंड अर्पित कर श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर भस्मी रमाई गई। इसके पश्चात भगवान महाकाल का भांग, ड्रायफ्रूट, आभूषणों और फूलों से राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भस्म अर्पित करने के पश्चात शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों से बनी फूलों की मालाएं अर्पित की गईं। फल, शक्कर से बने तिल के लड्डू और और तिल्ली के पकवानों का महाभोग लगाया गया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
इधर, उज्जैन में गुरुवार को भी मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया गया। सुबह से ही शिप्रा नदी के घाटों पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट सहित अन्य स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने शिप्रा नदी में पवित्र स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
रामघाट के पुजारी पंडित आनंद जोशी ने बताया कि मकर संक्रांति के अवसर पर शिप्रा स्नान का विशेष महत्व है, जिसे लेकर दूर-दराज से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। पावन स्नान को लेकर प्रशासन और नगर निगम द्वारा घाटों पर साफ-सफाई, सुरक्षा, पेयजल सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और होमगार्ड के जवान भी तैनात रहे, जिससे स्नान शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न हुआ। घाट क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। श्रद्धालु जयकारों के साथ पर्व की खुशियां मनाते नजर आए।

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