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Wednesday, March 4, 2026

भुइयांडीह में 14 से 16 जनवरी तक तीन दिवसीय टुसू मेला का होगा आयोजन

पूर्वी सिंहभूम। वीर बिरसा मुंडा और वीर सिद्धू–कान्हू की स्मृति को समर्पित झारखंड सांस्कृतिक कला रंग मंच के सौजन्य से भुईयांडीह स्थित दुर्गा पूजा मैदान में 14 जनवरी से 16 जनवरी तक तीन दिवसीय टुसू मेला आयोजित की जाएगी। साथ ही इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन होगा। यह आयोजन वर्ष 1980 से स्थापित और झारखंड सरकार में निबंधित संस्था सांस्कृतिक कला रंग मंच की ओर से किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को सशक्त बनाना है।
शनिवार को संवाददाताओं को संबोधित करते पूर्व मंत्री दुलाल भुईयां ने बताया कि मेले का उद्घाटन 14 जनवरी को किया जाएगा, जिसमें राज्य और क्षेत्र के कई विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, जमशेदपुर लोकसभा सांसद विद्युत वरण महतो और जमशेदपुर की विधायक पूर्णिमा साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों, मजदूर यूनियनों, आदिवासी एवं मूलवासी समाजों के प्रतिनिधि भी आयोजन में भाग लेंगे।
तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में पारंपरिक टुसू गीत, नृत्य, दुसु और चौड़ल प्रतियोगिता, बुढ़ी गाड़ी नाच सहित कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। समापन समारोह 16 जनवरी को संध्या 5 बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रतियोगिताओं के विजेताओं को नगद राशि, साड़ी, कंबल, शॉल, चावल, पोल्ट्री मुर्गा एवं अन्य आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। दुसु एवं चौड़ल प्रतियोगिता में महिला और पुरुषों की पूर्ण टीम की भागीदारी अनिवार्य होगी।
मेले के दौरान भुईयांडीह के स्वर्णरेखा नदी किनारे दूसु घाट पर तीनों दिन मुर्गा लड़ाई प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से लेकर 45वें पुरस्कार तक साइकिल, खस्सी, भेड़ा, आटा, चावल, सरसों तेल, आलू, प्याज, कंबल, शॉल, साड़ी और नगद राशि सहित अनेक पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि मुर्गा लड़ाई पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत लॉटरी प्रणाली से कराई जाएगी तथा किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ के प्रयोग पर सख्त प्रतिबंध रहेगा।
मेले में मनोरंजन के लिए बिजली झूला, ब्रेक डांस, मनिहारी दुकानें, फोटो स्टूडियो और अन्य आकर्षण भी लगाए जा रहे हैं, जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों के लोग मेले का आनंद ले सकें।

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