हिंदी सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री टैबू ने हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें उस दौर में फिल्मों में शुरुआत करने पर गर्व है — “1990-के दशक में मैं फिल्मी करियर की शुरुआत कर रही थी, और आज अगर मुझे चुनना हो तो मैं इस समय शुरुआत नहीं करती।”
उन्होंने यह स्वीकार किया कि इस समय फिल्म-उद्योग का स्वरूप पहले से काफी बदल चुका है और इस बदलाव से नए कलाकारों के सामने चुनौतियाँ भी अधिक हो गई हैं।
“मैं खुश हूँ कि मैंने जिस समय काम शुरू किया, वह समय था — उस वक्त मैं नई थी, महसूस कर रही थी, सीख रही थी,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज की पीढ़ी, सोशल मीडिया-प्रभाव, बहुत बड़ी मार्केटिंग और तेज बदलाव के कारण उस तरह की सहज शुरुआत नहीं पा सकती थी जैसी उन्हें प्राप्त हुई।
टैबू ने यह भी बताया कि उन्होंने करियर की शुरुआत में खुद को सिर्फ एक अभिनेत्री मात्र नहीं समझा, बल्कि अपने काम को एक जाति-परम्परा, सीखने की प्रक्रिया के रूप में लिया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें चुनौतियों, अनुभवों और फिल्मों-किरदारों में विविधता के अवसर मिले। उन्होंने यह माना कि आज फिल्मों के विकल्प ज्यादा हो गए हैं, लेकिन उसी्में गहरी-कला और सहज शुरुआत का महत्व शायद पहले जैसा नहीं है।
इंटरव्यू में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह अब भी नए प्रोजेक्ट्स के लिए खुली हैं, लेकिन यह कहना चाहती हैं कि अगर आज शुरुआत करनी होती तो चुनना आसान नहीं होता। उन्होंने अपने अनुभवों, संघर्षों व सफलताओं को इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया कि “समय-समय पर सही जगह व सही समय मिलना कितना अहम है।”
इस प्रकार, टैबू का यह बयान उन कलाकारों व प्रेमियों के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो फिल्म-जगत में शुरुआत करना चाहते हैं — यह दर्शाता है कि समय, परिस्थिति, और व्यक्तिगत तैयारी मिलकर सफल शुरुआत का आधार बनते हैं।


