ढाका – बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वर्तमान में देश में चल रही अंतरिम सरकार, जिसकी अगुवाई मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं, हिंसक और चरमपंथी नीतियों के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने इन नीतियों को भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव उत्पन्न करने वाला बताया है।
हसीना ने कहा कि भारत बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी है और अगर बांग्लादेश की सुरक्षा तथा समृद्धि को कायम रखना है तो यही रिश्ते बनाए रखने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और यूनुस-सरकार के बीच अगर तनाव है, तो उनका (हसीना का) उस तनाव से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर यातनाओं, सामाजिक-धार्मिक पीछे-हटने वाली नीतियों और भारत-विरोधी बयानों को बढ़ावा दिया है, जो बांग्लादेश-भारत के बीच बने रिश्तों को कमजोर करने जैसा कार्य कर रहा है।
इसके साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि अवामी लीग को आगामी चुनाव से बाहर रखा गया है और पार्टी प्रतिबंधित कर दी गई है, जो कि बांग्लादेश के संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लाखों बांग्लादेशियों को इस कारण मतदान करने का अधिकार नहीं मिलेगा।
हसीना ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए मानवता-विरोधी अपराधों के आरोप राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा संचालित एक ‘कंगारू अदालत’ ने लगाए हैं, जिसमें उचित प्रक्रिया व सबूत नहीं हैं।
इस प्रकार इस बयान में शेख हसीना ने राजनीतिक और संवैधानिक दोनों ही सवाल उठा दिए हैं—उनका कहना है कि देश की वर्तमान शासन व्यवस्था न केवल लोकतांत्रिक मानकों को चोट पहुंचा रही है बल्कि भारत-बांग्लादेश सम्बन्धों के लिए भी जोखिम पैदा कर रही है।


