नई दिल्ली — वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत को “विश्व-स्तरीय बैंकों” की आवश्यकता है और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों (PSBs) का समेकन एक संभव मार्ग हो सकता है।
उन्होंने बताया कि सरकार इस दिशा में भारतीय रिज़र्व बैंक और बैंकों के साथ चर्चा कर रही है ताकि कौन-कौन सी बैंकें इस प्रक्रिया में हों और किस तरह आगे बढ़ा जाए, यह तय किया जा सके।
वित्तमंत्री ने विशेष रूप से यह नहीं बताया कि किन बैंकों का विलय होगा या कब होगा, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली मर्जरों की तरह (जब 27 बैंकों को 12 में समेकित किया गया था) एक और ‘मर्जर साइकिल’ संभव है।
इस कदम के पीछे मुख्य सोच यह है कि बैंकिंग प्रणाली में बड़ी इकाइयाँ हों, जिनका दायरा व्यापक हो, पूंजी पर्याप्त हो, जोखिम सहन क्षमता मजबूत हो तथा ग्राहक-सेवाओं व कर्ज वितरण में गति आए।
हालाँकि, इस प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं —
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ग्राहकों के खाते, शाखाएँ, आईटी सिस्टम आदि का समेकन करना एक विशाल कार्य होगा।
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हितधारकों (कर्मचारी, प्रबंधन, बैंकर्स) को इस बदलाव में शामिल करना आवश्यक होगा ताकि निर्बाध सेवा बनी रहे।
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बैंकिंग नियम-कानून, विनियमन, बैंकिंग नीतियाँ इन बड़े समेकनों में समायोजित करने पड़ेंगे।


