खूंटी। जिले में पेयजल संकट को गंभीरता से लेते हुए सांसद कालीचरण मुंडा ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता को आवश्यक निर्देश दिए हैं। सोमवार को अपने आवासीय कार्यालय में विभागीय अधिकारी के साथ बैठक कर सांसद ने विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति और ग्रामीणों को हो रही परेशानियों की समीक्षा की।
बरसात के मौसम को देखते हुए सांसद ने जिले के सभी खराब चापाकलों और नल-जल योजनाओं को तत्काल दुरुस्त करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी ग्रामीण को पेयजल के लिए नदी, चुआं या डाड़ी के पानी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बारिश के दौरान दूषित पानी के इस्तेमाल से टाइफाइड, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
पेयजल संकट वाले गांवों की पहचान के निर्देश
सांसद ने उन पंचायतों और गांवों को चिह्नित करने का निर्देश दिया, जहां चापाकलों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर नए चापाकल लगाने को कहा। साथ ही खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत और नल-जल योजनाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने अधिकारियों से पेयजल संकट वाले गांवों की लगातार निगरानी करने और ग्रामीणों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने को कहा। अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र का भ्रमण कर जमीनी स्थिति की जानकारी लेने का भी निर्देश दिया।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी : सांसद
सांसद कालीचरण मुंडा ने स्पष्ट कहा कि खूंटी जिले के किसी भी गांव में पेयजल को लेकर लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ काम करते हुए ग्रामीणों तक स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना सुनिश्चित करना होगा।
