कोलकाता। कोलकाता की ऐतिहासिक देशप्रिय पार्क दुर्गोत्सव समिति ने कोलकाता नगर निगम पर अनावश्यक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है। समिति का कहना है कि पूजा संचालन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज उसके पास मौजूद हैं, फिर भी बार-बार नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
समिति के प्रवक्ता सारनाथ घोष ने बताया कि वर्ष 2021 में कोलकाता नगर निगम ने पूजा संचालन के लिए कार्यालय उपलब्ध कराया था। उसी समय से संबंधित डीड, लीज और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेज समिति के पास सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में नई कार्यकारिणी के गठन के बाद प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित किया गया, लेकिन राज्य में नई सरकार बनने के बाद नगर निगम की ओर से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
‘सभी दस्तावेज देंगे, लेकिन बार-बार नोटिस उचित नहीं’
सारनाथ घोष ने बताया कि 24 जुलाई को नगर निगम ने एक और नोटिस जारी कर क्लब और कार्यालय से जुड़े सभी दस्तावेज जमा करने को कहा है। उन्होंने कहा कि समिति जांच में पूरा सहयोग करेगी और सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएगी, लेकिन करीब 90 वर्ष पुरानी एक ऐतिहासिक और गैर-राजनीतिक संस्था को इस तरह बार-बार नोटिस देकर परेशान करना उचित नहीं है।
राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप
समिति के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कुछ अति वामपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर समिति को परेशान करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि वर्ष 1938 में स्थापित देशप्रिय पार्क दुर्गोत्सव समिति का कभी किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं रहा, लेकिन नई सरकार बनने के बाद उसे राजनीतिक विवादों में घसीटने और उसकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समिति के फंड पर नियंत्रण करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार
सारनाथ घोष ने बताया कि समिति ने अपनी समस्याओं से स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अवगत कराने का प्रयास किया, लेकिन कोई सकारात्मक सहयोग नहीं मिला। इसके बाद समिति ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मदद की गुहार लगाई है और उम्मीद जताई है कि राज्य की इस ऐतिहासिक दुर्गा पूजा समिति के कामकाज में किसी तरह का व्यवधान नहीं आने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समिति के खिलाफ अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
